अपडेटेड 22 March 2026 at 11:36 IST

Dhurandhar 2: दोस्ती, दुश्मनी या कुछ और? जानिए 'धुरंधर 2' में 'हमजा' ने 'आलम' को क्यों मारा... वजह रुला देगी

Dhurandhar 2 Most Emotional Scene: आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर 2' के सभी किरदार अपनी अलग पहचान से जाने जाते हैं। इसमें आलम और हमजा की दोस्ती भी अलग पहचान रखती है।

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Why Hamza Killed Aalam? | Image: Social Media

Dhurandhar 2 Why Hamza Killed Aalam: रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर 2' सिनेमाघरों में सिर्फ एक्शन ही नहीं दिखा रही, बल्कि लोगों को रुला भी रही है। इस फिल्म का एक सीन ऐसा है, जो सीधा दर्शकों के दिल में उतर गया है और हर किसी की आंखें नम कर रहा है। यह वह सीन है जब 'हमजा' अपने ही सबसे करीबी साथी 'आलम भाई' पर गोली चला देता है।

अगर आपने भी यह फिल्म नहीं देखी है और आपके मन में भी यह सवाल है कि आखिर हमजा ने ऐसा क्यों किया, तो आइए इस दर्दनाक सच को समझते हैं।

दांव पर लगा था पूरा मिशन

कहानी में एक वक्त ऐसा आता है जब हमजा और उसके बचपन के दोस्त पिंडा के बीच हाथापाई होती है और इसी बीच पिंडा का पैर फिसलने से सिर पर चोट लगने से मौत हो जाती है। इसी के दौरान आलम वहां आता है और सारा इल्जाम अपने सिर पर ले लेता है। हमजा दुश्मनों के बीच बुरी तरह घिर जाता है और उसकी असलियत पकड़ी जाने वाली होती है। देश के लिए की गई सारी मेहनत, सालों का पूरा मिशन और सबकुछ बस खत्म होने के कगार पर था।

उस एक छोटे से पल में एक बहुत बड़ा फैसला लेना था देश या दोस्त? अपना जीवन या अपना लक्ष्य?

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आलम भाई का सबसे बड़ा बलिदान

जैसे ही आलम भाई को एहसास हुआ कि हमजा और भारत का मिशन खतरे में है, उन्होंने बिना एक भी पल गंवाए सारा इल्जाम अपने ऊपर ले लिया। दुश्मनों का भरोसा जीतने और हमजा की पहचान छिपाने के लिए आलम ने खुद को दांव पर लगा दिया।

हमजा के हाथों में बंदूक थी और आंखों में आंसू। यह कोई दुश्मनी का पल नहीं था, बल्कि यह वो क्षण था जहां रिश्ते मरते हैं और राष्ट्र जन्म लेता है।

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आलम ने जाते-जाते बस एक नजर हमजा को देखा। उस आखिरी नजर में एक दोस्त का प्यार भी था, एक सीनियर का आदेश भी था, और एक अंतिम शिक्षा भी। आलम भाई ने जानबूझकर मौत को चुना, ताकि देश का मिशन जीवित रहे और दुश्मनों के बीच से सुरक्षित बच सके।

बरेली के एक पॉकेटमार की अमर शहादत

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सबसे भावुक कर देने वाली बात आलम भाई का अतीत है। बरेली का वो मामूली सा इंसान, जिसने कभी अपना पेट भरने के लिए जेबें काटी थीं, आज अपनी जान देकर इतिहास के पन्नों में अमर हो गया। अंत में साबित हो गया कि वही सच्चा योद्धा होता है जो खुद को मिटाकर, किसी और को और अपने देश को बचा ले।

छूट गई खारी चाय और रह गया गीता का संदेश

इन सबके बीच उनकी वो रोज की खारी नमकीन चाय भी कहीं दूर पीछे छूट गई। आलम भाई की इस शहादत को देखकर भगवद गीता का वो श्लोक याद आ जाता है  'स्वधर्मे निधनं श्रेय' 
इसका मतलब अपने धर्म में मरना भी परधर्म में जीने से श्रेष्ठ है। आलम ने अपने देश के प्रति अपने धर्म को निभाया और हंसते-हंसते अपनी जान दे दी।

यही वजह है कि जब हमजा गोली चलाता है, तो वह धोखा नहीं, बल्कि देशभक्ति की सबसे बड़ी और दर्दनाक कीमत होती है। 

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Published By : Samridhi Breja

पब्लिश्ड 22 March 2026 at 11:36 IST