Border 2: सनी देओल ऐसे ही नहीं बने सुपरस्टार, रियल लोकेशन पर की ‘बॉर्डर 2’ की शूटिंग, एक्शन सीन्स बने बड़ी चुनौती
Sunny Deol in Border 2: सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ आखिरकार बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है और धमाकेदार कमाई कर रही है। फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है जिसमें कमाल के एक्शन सीन्स देखने को मिले।
- मनोरंजन समाचार
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Sunny Deol in Border 2: सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ आखिरकार बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है और धमाकेदार कमाई कर रही है। फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है जिसमें कमाल के एक्शन सीन्स देखने को मिले। हालांकि, क्या आपको पता है कि ज्यादातर सीन्स रियल लोकेशन पर शूट हुए थे जिन्हें करने में पूरी टीम के पसीने छूट गए।
‘बॉर्डर 2’ के डायरेक्टर अनुराग सिंह ने बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में शूटिंग के दौरान आई सबसे बड़ी चुनौती को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कैसे उन्होंने पहले ही फैसला कर लिया था कि युद्ध से जुड़े सीन्स स्टूडियो की जगह, रियल लोकेशन पर शूट किए जाएंगे जिससे वो वास्तविक लगें।
देहरादून और झांसी में हुई ‘बॉर्डर 2’ की शूटिंग
अनुराग ने कहा कि "एक्शन सीक्वेंस में स्केल बढ़ जाता है और आपके पास 3-4 लोगों की टीम की जगह 400-500 लोगों की यूनिट बन जाती है। आप ग्रीन स्क्रीन पर नहीं, देहरादून या झांसी जैसी जगहों पर असली लोकेशन पर शूटिंग कर रहे होते हैं। वहां कड़ाके की ठंड होती है या झुलसती गर्मी, और आपको सुबह से शाम तक एक्शन करना होता है।”
उन्होंने आगे कहा कि वॉर सीक्वेंस में आपको सही कॉर्डिनेशन की भी बहुत जरूरत होती है। हर शॉट में कई डिपार्टमेंट एक साथ मिलकर काम करते हैं – ब्लास्ट और स्टंट से लेकर भीड़ की आवाजाही और एक्टर्स के खड़े होने की पॉजिशन तक, एक भी गलती की गुंजाइश नहीं रहती।
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डायरेक्टर ने समझाते हुए बताया कि कैसे एक्शन सीन्स में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है। अगर बम विस्फोट हो रहा है तो आसपास के लोग कैसे रिएक्ट करेंगे, एक्टर्स कितनी दूरी पर होंगे, कितनी आग आएगी आदि। ये केवल दो लोगों का काम नहीं होता, पीछे 500 लोगों की टीम भागादौड़ी कर रही होती है।
हवाई सीन्स शूट करना भी बड़ा चैलेंज
अनुराग ने कहा कि हवाई सीन्स शूट करना भी आसान नहीं था। विजुअल इफेक्ट की मदद से फाइटर प्लेन बनाए गए थे। उनके मुताबिक, “दूसरी मुश्किल बात यह थी कि कुछ चीजें आपके हाथ में नहीं हैं। विमानों की बात करें, तो जाहिर है कि विमान VFX से ही दिखाए जाएंगे। आपके पास असली विमान नहीं होते जिन्हें आप उड़ा सकें और शूट कर सकें, इसलिए इसके लिए VFX की जरूरत होती है। तो अब, आप इसे ऐसे लेवल पर ले जाते हुए बड़े पर्दे पर कैसे दिखाएं, ये भी बड़ा चैलेंज था"।