अपडेटेड 14 January 2026 at 11:43 IST
उम्र 40 पार, चोट ठीक होने के बाद भी नहीं जा रहा दर्द...तो आपको हो सकता है CRPS, इसी बीमारी से जूझ रहीं अर्चना पूरन सिंह; जानिए
बॉलीवुड और टीवी जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रही हैं। उनके बेटे आयुष्मान सेठी ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की है, जिसके बाद फैंस दुखी हैं और इस बीमारी के बारे में जानना चाह रहे हैं।
- मनोरंजन समाचार
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बॉलीवुड और टीवी जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रही हैं। उनके बेटे आयुष्मान सेठी ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की है, जिसके बाद फैंस दुखी हैं और इस बीमारी के बारे में जानना चाह रहे हैं। आयुष्मान ने बताया कि उनकी मां को 'कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम' (CRPS) नामक दुर्लभ और बेहद पीड़ादायक बीमारी हो गई है।
यह समस्या हड्डी टूटने (फ्रैक्चर) के बाद शुरू हुई। CRPS में मरीज को चोट ठीक होने के बावजूद लगातार असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है, जो उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल सकता है। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में विस्तार से।
CRPS क्या है?
CRPS एक जटिल और असाधारण दर्द संबंधी विकार है, जो ज्यादातर शरीर के किसी एक अंग जैसे हाथ, पैर, हथेली या उंगलियों को चपेट में ले लेता है। चोट या सर्जरी के बाद भी दर्द कम होने का नाम नहीं लेता, बल्कि सामान्य चोट से कई गुना ज्यादा तीव्र हो जाता है। यह न केवल शारीरिक रूप से परेशान करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।
इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
टाइप-1 (RSD): नसों को प्रत्यक्ष क्षति के बिना चोट या बीमारी के बाद होता है। पहले इसे रिफ्लेक्स सिम्पैथेटिक डिस्ट्रॉफी कहा जाता था।
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टाइप-2 (काउसाल्जिया): चोट से नसों को सीधा नुकसान पहुंचने पर विकसित होता है।
प्रमुख लक्षण
CRPS के संकेत चोट या ऑपरेशन के 4-6 सप्ताह बाद उभरने लगते हैं। इनमें शामिल हैं:
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- प्रभावित जगह पर जलन, चुभन या गहरा आंतरिक दर्द।
- हल्के स्पर्श, हवा या पानी के छूने से भी तीव्र पीड़ा।
- त्वचा का रंग बदलना- लाल, नीला या पीला पड़ना।
- तापमान में उतार-चढ़ाव- कभी उत्तप्त, कभी बर्फ-सी ठंडी।
- सूजन, अंग हिलाने में कठिनाई, त्वचा का पतला-चमकदार होना।
- नाखूनों या बालों की असामान्य वृद्धि।
कारण और खतरे के कारक
वैज्ञानिकों को अभी तक इसका स्पष्ट कारण नहीं पता चला, लेकिन केंद्रीय और परिधीय तंत्रिका तंत्र की खराबी या सूजन को जिम्मेदार माना जाता है। 90% केस चोटों से जुड़े होते हैं। जैसे फ्रैक्चर, सर्जरी, मोच, जलन या कट। कभी-कभी टाइट बैंडेज या प्लास्टर से भी नसों पर दबाव पड़ जाता है।
जोखिम वाले लोग
- वयस्क, खासकर 40 साल से ऊपर के।
- महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा आम।
- डायबिटीज, स्मोकिंग या ऑटोइम्यून बीमारियों से ग्रस्त।
- कुछ मामलों में आनुवंशिक कारक भी भूमिका निभाते हैं।
गौरतलब है कि अर्चना पूरन सिंह के फैंस उनकी जल्दी स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, जल्दी निदान और उपचार से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 14 January 2026 at 11:43 IST