अपडेटेड 7 November 2025 at 23:46 IST

EXPLAINER/ Bihar Election 2025: बिहार चुनाव के पहले चरण में वोटिंग की सुनामी क्यों आई? समझिए क्या है CMS फैक्टर, जिससे बढ़ा मतदान प्रतिशत

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बंपर वोटिंग हुई। इस मतदान ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। आइए समझते हैं कि बिहार में वोटिंग की सुनामी क्यों आई?

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बिहार चुनाव
बिहार चुनाव | Image: Republic

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बंपर वोटिंग हुई। इस मतदान ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। ऐसा लगा जैसे बिहार में अचानक लोगों की संख्या बढ़ गई, या फिर हर कोई अचानक जागरूक हो गया। हालांकि, मामला इतना भी आसान नहीं था।

इस दौरान वोटिंग ट्रेंड्स को गौर से परखने वालों ने CMS फैक्टर के बारे में बात की है। आपको बता दें कि CMS फैक्टर का मतलब है- छठ, महिलाएं और SIR

जान लें कि बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 64.69 प्रतिशत वोटिंग हुई। इसके बाद दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा और नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।

छठ की वजह से बढ़ा वोट प्रतिशत?

इस बार के बिहार चुनाव के पहले चरण में वोट प्रतिशत का सबसे बड़ा कारण छठ पूजा भी था। छठ पूजा की वजह से देशभर के कई राज्यों से लाखों लोग बिहार आए थे। इसके कुछ ही दिनों बाद बिहार में वोटिंग थी। घर लौटे कई लोगों ने मतदान में भाग लिया, जिसकी वजह से वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ। ऐसे में जानकारों का ये भी मानना है कि दूसरे चरण में वोट प्रतिशत घट सकता है।

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जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी कहा कि छठ के बाद यहां रुके प्रवासी श्रमिकों ने भी अपने लोगों से बड़ी संख्या में वोट कराया है, जिससे सभी हैरान हैं। इस चुनाव में महिलाएं निश्चित रूप से शामिल हैं, लेकिन प्रवासी श्रमिक एक्स फैक्टर बन गए हैं। वे अपने दोस्तों, परिवार से वोट करा रहे हैं।"

महिलाओं ने भी भर-भर कर दिया वोट

इस बार के बिहार चुनाव के पहले चरण में वोट प्रतिशत का दूसरा सबसे बड़ा कारण महिलाएं भी थी। NDA हो या महागठबंधन, दोनों ने महिलाओं को लुभाने के लिए बड़े-बड़े वादे किए, जिसके कारण महिलाएं वोट डालने के लिए भारी संख्या में पहुंचीं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "कुल 3,75,00,000 मतदाताओं ने वोटिंग की, जिसमें  1,98,00,000 पुरुष और 1,76,00,000 महिलाएं थीं। महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया।"

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आपको बता दें कि एक तरफ एनडीए ने 1 करोड़ नौकरियों का वादा किया। महिलाओं, दलितों, अति-पिछड़ों को आर्थिक-सहायता का वादा भी एनडीए के घोषणा पत्र में शामिल है। राज्य में बड़े निवेश, एक्सप्रेसवे, रेल आधुनिकीकरण का वादा, बाढ़ मुक्त बिहार, फ्री एजुकेशन और चिकित्सा सुविधा, कौशल-विकास केन्द्र, जिले-स्तर पर मेगा स्किल सेंटर आदि का प्रावधान जैसी बातें हर जनसभा में गूंजती रहीं।

महागठबंधन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के साथ महिलाओं-विधवाओं के लिए मासिक सहायता राशि की योजना पर अमल का वादा, छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त फॉर्म-एग्जाम फीस, टेबलेट, बड़े-स्तर की यूनिवर्सिटी-कॉलेज, माइक्रो-फाइनेंस कंपनियों पर सख्ती, भूमि-मुक्का रहितों को जमीन देने का वादा जैसे मुद्दों से सीधे वोटरों की नब्ज पर हाथ रखा।​

आपको ये भी बता दें कि देशभर के किसी भी राज्य में जब-जब बंपर वोटिंग हुई, महिलाओं ने उस चुनाव में जी भरके वोट किया था। हालांकि, ट्रेंड तो ये भी कहता है कि महिलाओं ने सत्ता परिवर्तन करने में भी कई चुनावों में अहम भूमिका निभाई है।

क्या SIR अभियान का मिला फायदा?

SIR अभियान के बाद बिहार की अंतिम मतदाता सूची में लगभग 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हुए, जो 2025 की शुरुआत में 7.8 करोड़ से कम थे। कुल मिलाकर, बिहार की एसआईआर-पूर्व मतदाता सूची से 68.66 लाख नाम हटा दिए गए हैं। 1 अगस्त को जारी मसौदा मतदाता सूची में 65 लाख नाम हटाए गए, जिनमें 22 लाख मृत मतदाता भी शामिल हैं। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन से पहले 3.66 लाख नाम और हटाए गए। 21 लाख नए मतदाता और जुड़े हैं।

आपको बता दें कि SIR की वजह से फर्जी और मृत मतदाताओं को लिस्ट से हटा दिया गया, जिसकी वजह से वोटिंग प्रतिशत भी तेजी से बढ़ा। ऐसे में वोट प्रतिशत बढ़ने का एक और बड़ा कारण SIR भी हो सकता है।

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 7 November 2025 at 23:46 IST