West Bengal Election: सीएए-यूसीसी, धुरंधरों की असली परीक्षा...TMC से ज्यादा BJP के लिए अहम क्यों है पहले चरण की 152 सीटों पर जीत

पश्चिम बंगाल में आज पहले चरण की वोटिंग जारी है। इसी के साथ आज का दिन सूबे की सियासत के लिए आर-पार की लड़ाई का गवाह बनने जा रहा है। पहले चरण की खासियत सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि इलाकों की विविधता के कारण भी बहुत महत्वपूर्ण है।

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West Bengal Election 2026
West Bengal Election 2026 | Image: ANI

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार यानी आज 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान है। मतदान प्रक्रिया सुबह 7 बजे से शुरू हो गई है जो शाम 6 बजे तक चलेगी। इस चरण में कुल 1478 उम्मीदवार मैदान में है, जिनकी किस्मत का फैसला करीब 3.60 करोड़ से ज्यादा वोटर्स तय करेंगे। इस चरण में बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर है। लेकिन ममता बनर्जी से अधिक भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर मानी जा रही है।

बंगाल के पहले चरण की खासियत सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि इलाकों की विविधता के कारण भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह चरण उत्तर बंगाल (कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार आदि) से लेकर जंगलमहल (बांकुरा, पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया के आदिवासी बहुल इलाके) और मतुआ गढ़ (उत्तर 24 परगना, नदिया आदि) तक फैला हुआ है। वहीं मतुआ समुदाय बंगाल की राजनीति में एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है।

BJP और TMC के लिए ‘करो या मरो' की स्थिति

इसके अलावा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मुकाबला सत्ता पर पहुंचने के लिए बेहद अहम माना जाता है। साल 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी पहले चरण के 152 सीटों में से 59 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी, वहीं दूसरे चरण की 142 सीटों पर वह सिर्फ 18 सीटों पर ही कब्जा कर पाई। ऐसे में भाजपा के सत्ता में आने की राह में पहला चरण काफी अहम है। साथ ही, बंगाल में कोई गठबंधन नहीं है, जिसका सीधा मतलब यह है कि बीजेपी अकेले ही TMC से लड़ रही है। यहां जीत का मतलब सिर्फ सीटें नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की 14 साल पुरानी सत्ता का अंत भी है। इतना ही नहीं, यह भाजपा के लिए ‘अकेले ही जीतने’ की ताकत साबित करेगा।

यह चुनाव टीएमसी के लिए भी उतना ही जरूरी हो गया है। ममता बनर्जी पिछले विधानसभा चुनाव में कम सीटों पर मिली जीत को जरूर बदलने की चाह रखती होंगी। 

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पहले चरण में इनकी किस्मत दांव पर

इस चरण में ममता सरकार के मंत्रियों के साथ-साथ बीजेपी के दिग्गजों की भी परीक्षा है। बंगाल में भाजपा का चेहरा माने जा रहे सुवेंदु अधिकारी (नंदीग्राम विधानसभा सीट) और दिलीप घोष (खड़गपुर सदर) का इम्तिहान है। यहीं से उनकी किस्मत का फैसला होना है।  

BJP के लिए पहला चरण क्यों निर्णायक?

भारतीय जनता पार्टी के लिए इस बार का विधानसभा चुनाव इसलिए भी बेहद अहम है, क्योंकि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री समेत पार्टी के तमाम शीर्ष नेताओं ने पहले चरण के क्षेत्रों में CAA और UCC को प्रमुख मुद्दा बनाकर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।  इस चरण के चुनाव में मतुआ और नामशूद्र समुदाय के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। भाजपा पहले ही साफ कर चुकी है कि सत्ता में आने के छह महीने के अंदर वह बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर देगी। 

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बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर वोटिंग हो रही है, जो सुबह 7 बजे से शुरू हो गई। पहला फेज राज्य की कुल 294 सीटों में से आधी से अधिक सीटों को कवर करता है। 

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Published By :
Priyanka Yadav
पब्लिश्ड