West Bengal Election 2026: 'ये ममता बनर्जी का जंगल राज है, संविधान की शपथ और प्यार रोहिंग्याओं से...' , मालदा में बवाल पर भड़की BJP
पश्चिम बंगाल के मालदा में कल SIR प्रक्रिया के दौरान 3 महिला समेत 7 न्यायिक अधिकारियों को करीब घंटे बंधक बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूर्व-नियोजित साजिश बताते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात करने को कहा।
- चुनाव न्यूज़
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आजाद भारत के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि चुनावी प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया। 1 अप्रैल दोपहर 2-3 बजे के आसपास पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को लोटर लिस्ट में तैनात लोगों ने घेर लिया। इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं।
BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया ने बताया कि अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाए रखा गया। रात 12-1 बजे के आसपास उन्हें रिहा करवाया गया, लेकिन जब वे जा रहे थे तो उनकी गाड़ियों पर पथराव भी किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर माना है और राज्य सरकार पर सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश ने खुद देर रात तक स्थिति की निगरानी की। कोर्ट ने राज्य के होम सेक्रेटरी, डीजीपी और अन्य अधिकारियों से जवाब मांगा है। साथ ही, न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं।
"ममता बनर्जी को रोहिंग्याओं से प्यार"
BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि "पश्चिम बंगाल का जंगलराज हर भारतीय देख रहा है। यही है ममता बनर्जी का जंगलराज... यह इसलिए है क्योंकि ममता बनर्जी ने शपथ ली है संविधान की, लेकिन प्यार किया है रोहिंग्याओं से है।"
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SIR प्रक्रिया और विवाद
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग का एक विशेष अभियान है, जिसमें वोटर लिस्ट की गहन समीक्षा की जाती है। इसमें संदिग्ध नामों को हटाने, दावों-आपत्तियों को सुनने और सही वोटरों को शामिल करने का काम होता है। पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया पिछले कई महीनों से चल रही है, लेकिन सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इसका लगातार विरोध कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक फैसले में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायिक अधिकारियों को इस प्रक्रिया में दावों-आपत्तियों की सुनवाई सौंपी थी। कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार योग्य अधिकारी उपलब्ध नहीं करा रही है, इसलिए न्यायपालिका को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
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मालदा जिले में SIR के तहत कुछ नामों को वोटर लिस्ट से हटाए जाने पर स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी सड़क जाम लगा रहे थे, टायर जलाए गए और पथराव भी हुआ। न्यायिक अधिकारी जब दावों-आपत्तियों की सुनवाई कर रहे थे, तभी उन्हें घेर लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को पूर्व-नियोजित साजिश करार दिया है, जिसका मकसद न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करना है।
ममता सरकार पर सवाल
इस घटना ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों, खासकर BJP का कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्राथमिकता राज्य की जनता या संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कुछ खास वोट बैंक की रक्षा करना है। SIR का विरोध मुख्य रूप से उन नामों को बचाने के लिए किया जा रहा है जो संदिग्ध हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ममता सरकार को कई बार फटकार लगाई है। फरवरी-मार्च 2026 में SIR मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को साफ कहा था कि “कोई बहाना न बनाएं, प्रक्रिया को बाधित न करें।” न्यायिक अधिकारियों पर हमले के बाद कोर्ट ने राज्य की पुलिस व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई है।