कभी दीदी के थे करीबी, इस एक बात की कसक से शुरू हुई बगावत... ममता को सत्ता से उखाड़ फेंकने वाले सुवेंदु अधिकारी के 'जायंट किलर' बनने की कहानी
पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की तैयारी पूरी हो चुकी है। बीजेपी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हारने वाले दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी सुबह 11 बजे सीएम पद की शपथ ग्रहण करेंगे।
- चुनाव न्यूज़
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पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की तैयारी पूरी हो चुकी है। बीजेपी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हारने वाले दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी सुबह 11 बजे सीएम पद की शपथ ग्रहण करेंगे। ये वही सुवेंदु अधिकारी है जो कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद हुआ करते थे। टीएमसी को मजबूत करने में उन्होंने ममता के साथ कदम से कदम मिलाया और अहम भूमिका निभाई थी। नंदीग्राम आंदोलन से लेकर सत्ता में आने तक का सफर उनके साथ जुड़ा रहा, लेकिन महत्वाकांक्षा और आंतरिक कलह ने रिश्तों को तोड़ दिया।
2007 में नंदीग्राम में तत्कालीन सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य ने टाटा नैनो फैक्ट्री के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित करने की कोशिश की, जिसके खिलाफ ममता बनर्जी ने आंदोलन छेड़ा। सुवेंदु अधिकारी ने घर-घर जाकर लोगों को संगठित किया और आंदोलन के 'कमांडर' बन गए। इस आंदोलन ने वामपंथी सरकार को कमजोर किया और सुवेंदु को ममता का अटूट भरोसा दिलाया, जिससे वो पूर्व मेदिनीपुर से लेकर जंगलमहल तक पार्टी के प्रमुख चेहरा बने।
सत्ता में साथी से उत्तराधिकारी तक का सफर
2011 में टीएमसी की जीत के बाद ममता ने सुवेंदु को परिवहन मंत्रालय सौंपा, फिर सिंचाई और जल संसाधन जैसे बड़े विभाग दिए। पूरा अधिकारी परिवार पिता शिशिर और भाई दिब्येंदु को महत्वपूर्ण पद मिले। मेदिनीपुर में 'अधिकारी राज' जैसी स्थिति बनी। सुवेंदु को ममता के बाद नंबर दो माना जाने लगा। वो 2009 और 2014 में तमलुक से सांसद बने।
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ममता-सुवेंदु के रिश्ते खराब होने के मुख्य कारण
रिश्ते खराब होने का मुख्य कारण अभिषेक बनर्जी का बढ़ता कद और 2019 लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की भूमिका रही। जिनसे सुवेंदु असहज हुए। उनसे जिलों की जिम्मेदारी छीनी गई। वंशवाद और अहंकार पर बिना नाम लिए निशाना साधा जाने लगा। इसके बाद जब अभिषेक को ममता का उत्तराधिकारी घोषित किया गया तो सुवेंदु को लगने लगा कि उनका जमीनी प्रभाव कम हो रहा है।
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इस्तीफा और बीजेपी में एंट्री
10 नवंबर 2020 को नंदीग्राम रैली से बगावत शुरू हुई। सुवेंदु ने 26 नवंबर को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।16 दिसंबर को विधायक पद और प्राथमिक सदस्यता छोड़ी। 19 दिसंबर को अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी जॉइन की। हालांकि ममता ने सुवेंदु को मनाने के लिए सौगत रॉय, सुदीप बंदोपाध्याय और अभिषेक को भेजा। एक बैठक में खुद फोन भी किया लेकिन सुवेंदु नहीं माने। उसके अगले दिन ही सुवेंदु ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
नंदीग्राम में ऐतिहासिक जीत
2021 चुनाव में सुवेंदु ने नंदीग्राम से ममता को 1,956 वोटों से हराया। इससे टीएमसी को बड़ा झटका लगा और यहीं से व्यक्तिगत और राजनीतिक दुश्मनी का चरम पर पहुंच गई।