Bengal Election Result: आरजी कर रेप पीड़िता की मां को बीजेपी ने दिया था टिकट, पानीहाटी सीट से चल रहीं आगे, कहा- मेरी लड़ाई यहीं खत्म नहीं...
आरजी कर की पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ पनिहार सीट पर आगे चल रही है। ये वो सीट है जिसपर TMC ने 2011 से लगातार कब्जा जमा रखा था। मगर इस बार यहां बड़ा उल्टफेर होता नजर आ रहा है।
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पश्चिम बंगाल की सियासत में 15 साल बाद बड़ा परिवर्तन होता नजर आ रहा है। लंबे समय बाद जिस घड़ी का इंतजार बीजेपी के कार्यकर्ता से लेकर नेता कर रहे थे, आखिरकर वो पल गया। अब तक के रुझानों में बीजेपी बंगाल में सरकार बनाती नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सीटों में से 190 से ज्यादा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी बढ़त बना ली है। इस बार के चुनाव में बंगाल की कई सीटें चर्चा में रहीं। इनमें से एक सीट, पानीहाटी विधानसभा सीट है। इस सीट पर बीजेपी ने आरजी कर मामले की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाया। जानते हैं पनिहार सीट पर अब तक के रुझानों में कौन आगे है?
आरजी कर की पीड़ित छात्रा की मां रत्ना देबनाथ, जो कभी एक आम नागरिक की जिंदगी जी रही थी और बेटी के जाने का शोक में डूबी थी, अब एक ऐसी 'जायंट-किलर' (बड़े दिग्गजों को हराने वाली) के रूप में उभरी हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शहरी-औद्योगिक वर्चस्व को खत्म कर दिया। अब तक के रुझाानों में रत्ना देबनाथ देबनाथ पानीहाटी सीट पर 56,000 से अधिक वोटों की भारी बढ़त बनाए हुए थीं
मेरी लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती-रत्ना देबनाथ
पानीहाटी वो सीट है जिस पर TMC ने 2011 से लगातार कब्जा जमा रखा था। उनकी यह बढ़त सिर्फ एक सीट की जीत नहीं है। बल्कि यह एक ऐसा नैतिक विमर्श है जिसने ममता बनर्जी के चौथे कार्यकाल की दावेदारी को पटरी से उतार दिया। इस बढ़त पर रत्ना देबनाथ ने कहा, "मेरी बेटी सिर्फ मेरी बेटी नहीं है, वह पूरे राष्ट्र की बेटी है। पूरी दुनिया पानीहाटी को देख रही थी... मेरी लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती। जब तक मैं जीवित रहूंगी, मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगी, अभी न्यायालय में मामला चल रहा है। मेरी लड़ाई आगे जारी रहेगी, यह नए विचारों की लड़ाई है।"
BJP ने खेला था बड़ा दावा
देबनाथ को चुनाव मैदान में उतारकर, BJP ने चुनाव का रुख 'दीदी बनाम मोदी' से बदलकर 'नागरिक बनाम व्यवस्था' की ओर मोड़ दिया। उनकी हर रैली में नीतियों की बात नहीं होती थी; बल्कि वह RG Kar त्रासदी की एक याद दिलाती थी। उनके चुनावी अभियान का नारा था, "मेरी बेटी के साथ जो त्रासदी हुई, वह किसी के भी साथ हो सकती थी"।