हार के बाद भी ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से कर दिया इनकार, तो खड़ा हो जाएगा संवैधानिक संकट? राज्यपाल के पास क्या-क्या है ऑप्शन

ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से इनकार करने पर राजनीतिक गलियारों में अब सवाल उठने लगा है कि आखिर बीजेपी के लिए यह संकट कितना गहरा जाएगा और राज्यपाल इस पर क्या रुख अपनाते हैं?

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Mamata Banerjee
Mamata Banerjee | Image: ANI/File Photo

बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी और खुद की हार को लेकर ममता बनर्जी ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बड़े दावे किए। इस दौरान उन्होंने यह भी घोषणा कर दी कि हार के बावजूद वो मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ेंगी। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर वोट चोरी समेत कई सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि वो आखिरी सांस तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। उनके इस ऐलान ने बंगाल की सियासत में सनसनी मचा दी है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि अगर दीदी इस्तीफा नहीं देती हैं तो क्या  संवैधानिक संकट खड़ा हो जाएगा? ऐसे में राज्यपाल के पास क्या-क्या ऑप्शन होगा?

पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन हो गया है। विधानसभा चुनाव 2026 में BJP ने दो-तिहाई बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वहीं, बंगाल की सत्ता पर दशकों से ज्यादा समय तक राज करने वाली TMC मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद, बीजेपी अब बंगाल में सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है। मगर आज ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के ऐलान के बाद नई सियासी भूचाल आ गया है।

ममता ने इस्तीफा देने से किया इनकार

मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने जब ममता बनर्जी से उनके इस्तीफे को लेकर सवाल किया तो जबाव में उन्होंने कहा, "मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, मैं हारी नहीं, मैं राजभवन नहीं जाऊंगी... सवाल ही नहीं उठता। नहीं। अब, मैं यह भी कहना चाहती हूं कि हम चुनाव नहीं हारे। यह हमें हराने की उनकी कोशिश है। आधिकारिक तौर पर, चुनाव आयोग के जरिए, वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हम चुनाव जीत गए हैं।"

कालीघाट स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान ममता बनर्जी ने आक्रामक अंदाज में कहा, 'मैं उन लोगों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करूंगी जिन्होंने जनादेश को लूट लिया है। कई सीटों पर हमारे उम्मीदवारों को जबरन हराया गया और ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की गई।' उन्होंने जोर देकर कहा, 'जब तक हर एक वोट की दोबारा गिनती (VVPAT स्लिप काउंटिंग) नहीं हो जाती, मैं इस्तीफा नहीं दूंगी।'

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ममता के इस्तीफा ना देने से खड़ा होगा संवैधानिक संकट?

राजनीतिक गलियारों में अब सवाल उठने लगा है कि आखिर यह संकट कितना गहरा जाएगा और राज्यपाल तथा केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।अभी तक राज्यपाल से ममता बनर्जी की मुलाकात या इस्तीफे संबंधी कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। जानकारों की मानें तो चुनाव नतीजों को चुनौती देना ममता बनर्जी का लोकतांत्रिक अधिकार है जो कोई छीन नहीं सकता। मगर जब तक अदालत कोई आदेश नहीं दे देती, तब तक उन्हें ECI के जनादेश का पालन करना होगा।

राज्यपाल के पास के क्या-क्या है ऑप्शन

वहीं, राज्यपाल को यह भी अधिकार है कि विधानसभा का 5 साल का कार्यकाल खत्म होने पर उसे भंग कर दे। बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को खत्म हो रहा है, ऐसे में ममता के इस्तीफा नहीं देने से कुछ खास दिक्कत नहीं आएगी, क्योंकि जनादेश समाप्त होने के बाद राज्यपाल सदन और सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं।

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कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देती हैं तो राज्यपाल के पास अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने या मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने का भी अधिकार है। ममता बनर्जी के इस फैसले ने राज्य में बड़े संवैधानिक संकट की आशंका पैदा कर दी है। लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार, चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री को राज्यपाल के समक्ष इस्तीफा सौंपना होता है, लेकिन TMC प्रमुख इस पर तैयार नहीं हैं। अगले 24 घंटे बेहद अहम हैं। ममता बनर्जी का यह नया ‘खेला’ बंगाल को किस दिशा में ले जाएगा, यह जल्द ही साफ होने वाला है।

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Published By :
Rupam Kumari
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