बूथ लेवल मॉनिटरिंग, एंटी इनकम्बेसी पर फोकस... आखिर BJP के चाणक्य अमित शाह ने बंगाल में ममता बनर्जी की TMC का कैसे किया सूपड़ा साफ?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में BJP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। आईए जानते हैं शाह के किन-किन रणनीतियों की वजह से बंगाल में ममता बनर्जी की TMC का सूफड़ा साफ हो गया।
- चुनाव न्यूज़
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त देकर BJP ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। वहीं, वहीं, बंगाल की सत्ता पर दशकों से ज्यादा समय तक राज करने वाली TMC मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। अब इस जीत का श्रेय पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह को दिया जा रहा है। आईए जानते हैं शाह के किन-किन रणनीतियों की वजह से बंगाल में ममता बनर्जी की TMC का सूफड़ा साफ हो गया।
पार्टी सूत्रों और आंतरिक आकलन के अनुसार, इस जीत के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दूरदर्शी और सूक्ष्म रणनीति का सबसे बड़ा हाथ माना जा रहा है। बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने बिहार चुनाव से बहुत पहले ही बंगाल की तैयारियां शुरू कर दी थीं। बंगाल दौरा, बैठकों का दौर बिहार चुनाव के साथ शुरू हो गया था। पार्टी नेताओं का कहना है कि शाह की डेटा-आधारित योजना, जमीनी स्तर का जुड़ाव और संगठनात्मक मजबूती ने ममता बनर्जी के गढ़ को भेदने में अहम भूमिका निभाई।
सीटों को A से E श्रेणी में बांटने की रणनीति
अमित शाह ने चुनावी रणनीति को और प्रभावी बनाने के लिए सीटों को पांच श्रेणियों में बांटा।
- A श्रेणी: जहां जीत लगभग तय मानी जा रही थी।
- B श्रेणी: अनुकूल माहौल वाली सीटें।
- C श्रेणी: TMC के साथ सीधी टक्कर वाली सीटें।
- D और E श्रेणी: चुनौतीपूर्ण और कमजोर सीटें।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सीटों के जिन श्रेणियों में बंटवारा किया था, उसी आधार पर काम भी किया गया। इसका परिणाम ये हुआ कि लगातार निगरानी और संसाधनों की सही तैनाती से कई E श्रेणी की सीटें धीरे-धीरे A श्रेणी में बदल गईं। राजनीतिक जानकारी इस माइक्रो-मैनेजमेंट को बीजेपी की जीत का बड़ा कारण बताया जा रहा है।
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एंटी इनकंबेंसी पर फोकस
अमित शाह ने पार्टी की आंतरिक बैठकें में बार-बार ममता सरकार के खिलाफ बढ़ती नाराजगी (एंटी इनकंबेंसी) पर जोर दिया। महिलाओं की सुरक्षा, बेरोजगारी, औद्योगिक गिरावट और राजनीतिक दबाव जैसे स्थानीय मुद्दों को पार्टी ने केंद्र में रखा। भवानीपुर जैसी ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट पर भी बीजेपी की रणनीति काम आई और पार्टी ने यहां ऐसा प्रदर्शन किया कि ममता बनर्जी अपनी सीट बचा नहीं पाई।
बूथ लेवल मॉनिटरिंग
चुनाव अभियान के दौरान अमित शाह ने पूरे पश्चिम बंगाल में 40 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, 39 जिलों का दौरा किया, 29 जनसभाएं कीं और 11 रोड शो आयोजित किए। गंगासागर और कपिल मुनि आश्रम जैसे सांस्कृतिक स्थलों के दौरे से उन्होंने स्थानीय भावनाओं से जुड़ने का प्रयास भी किया। बीजेपी ने बंगाल में सनातन को बड़ा मुद्दा बनाया। मतदान के दौरान शाह ने केंद्रीय वॉर रूम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की और देर रात तक समीक्षा बैठकें चलाईं। इसका परिणाम आज पूरा भारत देख रहा है।