दुश्मनों के रडार से गायब हो जाएंगे भारतीय युद्धपोत... भारत-जापान के बीच ऐतिहासिक डिफेंस डील, इस सीक्रेट निंजा तकनीक से चीन की बढ़ेगी टेंशन!

भारत ने जापान के साथ हाथ मिलाकर एक ऐसा कदम उठाया है, जो आने वाले सालों में भारतीय नौसेना की पूरी तस्वीर बदल सकता है।

India-Japan Deal
India-Japan Deal | Image: X

भारत ने जापान के साथ हाथ मिलाकर एक ऐसा कदम उठाया है, जो आने वाले सालों में भारतीय नौसेना की पूरी तस्वीर बदल सकता है। गुरुवार को भारत और जापान के बीच एक बड़ी डिफेंस डील को औपचारिक रूप दिया गया, जिसके तहत दोनों देश मिलकर एक खास "नेवल रेडियो एंटीना" तैयार करेंगे। इसका नाम है- UNICORN।

सुनने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म के गैजेट जैसा लगता है, लेकिन असल में यह भारतीय युद्धपोतों को दुश्मन की रडार पकड़ से लगभग गायब कर देने वाली टेक्नोलॉजी है।

कैसे काम करेगा UNICORN?

किसी भी युद्धपोत पर कई तरह के एंटीना लगे होते हैं, जैसे- कम्युनिकेशन के लिए अलग, रडार के लिए अलग, और सर्विलांस यानी निगरानी के लिए अलग। इतने सारे एंटीना जहाज पर बिखरे होने से न सिर्फ जहाज रडार पर ज्यादा साफ दिखता है, बल्कि इनके सिग्नल भी आपस में टकराते रहते हैं। UNICORN इस पूरी झंझट को खत्म करता है। यह सारे कम्युनिकेशन, रडार और सर्विलांस एंटीना को एक ही "मास्ट" यानी एक ही खंभेनुमा ढांचे में समेट देता है, जिसे सीधे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर फिट किया जाएगा।

PM मोदी ने क्या कहा?

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को दोनों देशों के बीच पहला रक्षा सह-विकास प्रोजेक्ट बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत-जापान रक्षा तकनीकी साझेदारी में एक नया अध्याय खोलेगा और अब दोनों देश मिलकर ऐसी रक्षा तकनीकों पर काम करेंगे, जो क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करें।

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कौन बनाएगा ये हाईटेक एंटीना?

अब सवाल यह है कि यह हाईटेक एंटीना बनाएगा कौन। इसकी जिम्मेदारी भारत की सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL को दी गई है, जो जापान की दिग्गज डिफेंस टेक कंपनियों यानी NEC कॉरपोरेशन, योकोहामा रबर और सांपा कोग्यो के साथ मिलकर इसे भारत में ही तैयार करेगी। नवंबर 2024 में हुए मूल समझौते के मुताबिक जापान इसमें अपने "नोरा-50" एंटीना की एडवांस डिजाइन एक्सपर्टीज देगा, जबकि भारत की भूमिका इसे असेंबल करने यानी इंटीग्रेशन और को-प्रोडक्शन तक सीमित रहेगी।

चीन के लिए क्यों बढ़ेगी टेंशन?

यह टेक्नोलॉजी अभी तक सिर्फ जापान की मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स पर ही लगी हुई थी। रक्षा जानकारों की मानें तो एशिया में फिलीपींस के बाद भारत दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसे यह जापानी स्टेल्थ तकनीक मिली है। फिलहाल भारतीय नौसेना अपनी बाहरी कम्युनिकेशन जरूरतों के लिए स्वदेशी "एडवांस्ड कंपोजिट कम्युनिकेशन सिस्टम" यानी ACCS पर निर्भर है, जिसे BEL ने ही तैयार किया है।

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लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि UNICORN इससे कहीं आगे की चीज है। जब जहाज पर ढेर सारे अलग-अलग एंटीना पास-पास लगे होते हैं, तो उनके सिग्नल आपस में उलझ जाते हैं, जिसे "सिग्नल क्लटर" कहा जाता है और यही क्लटर दुश्मन के रडार सिस्टम को जहाज को पहचानने में मदद करता है। UNICORN इस क्लटर को खत्म करके जहाज के "रडार क्रॉस सेक्शन" यानी RCS को घटा देता है, जिसका मतलब है कि जहाज अब दुश्मन की रडार स्क्रीन पर उतना साफ नहीं दिखेगा जितना पहले दिखता था। यानी सीधी भाषा में कहें तो भारतीय युद्धपोत अब समंदर में एक "छुपे हुए शिकारी" की तरह मौजूद रह सकेंगे।

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Published By:
 Kunal Verma
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