अपडेटेड 6 February 2026 at 20:54 IST

ओडिशा के तट पर भारत ने किया 'धमाका', Agni-3 की गूंज सुनकर ही थर्रा उठी दुश्मनों की जमीन; जानिए कैसे चीन-पाकिस्तान के उड़ेंगे होश

भारत ने 6 फरवरी, 2026 को ओडिशा के चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-3 का सफल परीक्षण किया।

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Agni-3 test
Agni-3 test | Image: Freepik/X

Agni-3: भारत ने 6 फरवरी, 2026 को ओडिशा के चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-3 का सफल परीक्षण किया। इस लॉन्च से मिसाइल के सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर सही साबित हुए। यह परीक्षण स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में किया गया, जिससे सिस्टम की विश्वसनीयता और तैयारी की पुष्टि हुई।

अग्नि 3 मिसाइल की रेंज लगभग 3,000 से 3,500 किलोमीटर है और यह भारत की स्ट्रेटेजिक डिफेंस क्षमता का एक अहम हिस्सा है।

रक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी

रक्षा मंत्रालय ने अपने एक्स पोस्ट पर लिखा, "इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि 3 का 6 फरवरी 2026 को इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर, ओडिशा से सफलतापूर्वक टेस्ट-फायर किया गया। लॉन्च ने सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर को वेरिफाई किया और यह स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में किया गया।"

आपको बता दें कि इस परीक्षण के साथ, अग्नि मिसाइल सीरीज भारत की रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूत कर रही है। इस सीरीज में 700 किमी रेंज वाली अग्नि-1, 2,000 किमी रेंज वाली अग्नि-2, 3,000 किमी रेंज वाली अग्नि-3, 4,000 किमी तक के टारगेट पर हमला करने में सक्षम अग्नि-4 और 5,000 किमी की सबसे लंबी मारक क्षमता वाली अग्नि-5 शामिल हैं।

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अग्नि-3 बैलिस्टिक मिसाइल के बारे में

भारत की अग्नि-3 एक न्यूक्लियर हथियार वाली इंटरमीडिएट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है जो 3-3,500 किलोमीटर दूर तक के टारगेट पर हमला कर सकती है। यह मिसाइल भारतीय सेना को दुश्मन के इलाके में काफी अंदर तक रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता देती है। रक्षा अधिकारियों ने कहा कि सफल परीक्षण ने मिसाइल सिस्टम की विश्वसनीयता और तैयारी की पुष्टि की है।

जबकि अन्य अग्नि मिसाइलों, जिनमें उनके अपग्रेडेड वेरिएंट भी शामिल हैं, का हाल ही में परीक्षण किया गया है। अग्नि-3 मिसाइल भारत की निवारक क्षमता के एक भरोसेमंद स्तंभ के रूप में रणनीतिक महत्व रखती है।

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यह मिसाइल दो स्टेज वाला, सॉलिड फ्यूल से चलने वाला सिस्टम है। जब पहला स्टेज अपना काम पूरा कर लेता है, तो दूसरा स्टेज चालू हो जाता है, जो मिसाइल को उसके तय टारगेट की ओर आगे बढ़ाता है और स्थिरता और सटीकता सुनिश्चित करता है।

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 6 February 2026 at 20:54 IST