PM मोदी की योजनाओं ने देश में ADAS टेक्नोलॉजी का खेल बदला, सेंसर्स का भारत में ही डिजाइन, टेस्ट और निर्माण हुआ संभव
भारत का ऑटोमोटिव उद्योग एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। Advanced Driver Assistance Systems के लिए भारत उन सेंसर्स, सिस्टम और सप्लाई चेन को देश में ही विकसित कर सकता है, जो ADAS के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए जरूरी हैं और वह भी ऐसी लागत पर जो मास मार्केट के लिए व्यावहारिक हो।
- बिजनेस न्यूज
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भारत का ऑटोमोटिव उद्योग एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। Advanced Driver Assistance Systems (ADAS), जो कभी केवल प्रीमियम और लग्जरी वाहनों तक सीमित तकनीक मानी जाती थी, अब तेजी से मुख्यधारा की जरूरत और उपभोक्ता अपेक्षा बनती जा रही है। बढ़ती सुरक्षा जागरूकता, सख्त होते नियामकीय मानदंड और Bharat NCAP क्रैश-रेटिंग कार्यक्रम इसके प्रमुख कारण हैं। आज विभिन्न सेगमेंट की ऑटोमोबाइल कंपनियां Adaptive Cruise Control, Lane-Keep Assist, Automatic Emergency Braking और 360-degree Camera Systems जैसी सुविधाओं को लग्जरी से मिड सेगमेंट कीमत वाली गाड़ियों में भी शामिल कर रही हैं।
हालांकि, असली कहानी सिर्फ ADAS के बढ़ते इस्तेमाल की नहीं, बल्कि इसके निर्माण की है। भारतीय ऑटो-कंपोनेंट इकोसिस्टम के सामने अब सवाल यह नहीं है कि ADAS बड़े पैमाने पर अपनाया जाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि क्या भारत उन सेंसर्स, सिस्टम और सप्लाई चेन को देश में ही विकसित कर सकता है, जो ADAS के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए जरूरी हैं और वह भी ऐसी लागत पर जो मास मार्केट के लिए व्यावहारिक हो।
क्या होता है ADAS
ADAS (Advanced Driver Assistance Systems गाड़ियों में मिलने वाली एक आधुनिक सुरक्षा तकनीक है। इसका मुख्य उद्देश्य दुर्घटनाओं को रोकना और ड्राइविंग को आसान व सुरक्षित बनाना है। ADAS गाड़ी में लगे सेंसर, कैमरा, रडार और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से सड़क के माहौल पर लगातार नज़र रखता है और ड्राइवर को सतर्क करता है या ज़रूरत पड़ने पर खुद फैसले लेता है।
Sensor Bottleneck
ADAS मूल रूप से एक सेंसर ड्रिवन टेक्नोलॉजी स्टैक है। Radar, LiDAR, Ultrasonic Sensors और Camera Modules मिलकर इसका पेरसेप्शन लेयर तैयार करते हैं, जो असिस्टेड ड्राइविंग को संभव बनाता है। वर्तमान में इन Components का एक बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है। इससे कंपनियों (OEM) को मुद्रा की अस्थिरता, लंबी लीड टाइम्स और भू-राजनीतिक (Geopolitical) सप्लाई-चेन जोखिम का सामना करना पड़ता है।
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हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर की कमी के दौरान सामने आई सप्लाई चेन चुनौतियों ने इस निर्भरता की कमजोरियों को स्पष्ट रूप से उजागर किया था।
भारत में ADAS उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए पुर्ज़े बनाने वाली कंपनियाँ को वैल्यू चेन में ऊपर जाना होगा। इसका अर्थ केवल इंपोर्टड मॉड्यूल को Assemble करने से आगे बढ़कर सेंसर्स को देश में ही डिजाइन और निर्माण करना होगा।
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यह बदलाव आसान नहीं होगा। इसके लिए Precision Manufacturing Lines, Calibration Infrastructure और ऐसे Rigorous Testing Protocols में निवेश की आवश्यकता होगी, जो Automotive-Grade Reliability Standards को पूरा करते हों। इन Components को भारत जैसे बाजार में अत्यधिक गर्मी, धूल, कंपन और अलग-अलग सड़क परिस्थितियों के बावजूद लगातार और भरोसेमंद तरीके से काम करना होगा।
पीएम मोदी की योजनाओं ने खेल बदला
पीएम मोदी की योजनाओं ने ऑटो सेक्टर में भी खेल बदल दिया है। मेक इन इंडिया को बल देने के लिए भारत सरकार की Production Linked Incentive (PLI) Scheme और PM E-DRIVE Initiative जैसी योजना इस बदलाव को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं ने कंपनियों को Advanced Automotive Electronics Manufacturing को स्थानीय स्तर पर विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया है, बजाय इसके कि वे केवल पार्ट्स का आयात कर उनका असेंबल करें।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ये नीतियां इन उद्योग को "Make in India, Design in India" मॉडल की ओर ले जा रही हैं, जो "Make in India, Import the Brains" मॉडल से आगे की सोच है।
ADAS के संदर्भ में यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन सिस्टम में Embedded Intelligence यानी वह सॉफ्टवेयर जो विभिन्न सेंसर्स से प्राप्त डेटा को जोड़कर वास्तविक समय में ड्राइविंग से जुड़े फ़ैसले को संभव बनाता है। वहीं सबसे अधिक वैल्यू और कॉम्पिटिटिव एडवांटेज पैदा करता है।
ऐसी नीतिगत प्रोत्साहन जो केवल मैन्युफैक्चरिंग और फाइनल असेंबली के बजाय घरेलू R&D को भी प्रोत्साहित करती हैं। यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि भारत वास्तव में एक ADAS मैन्युफैक्चरिंग हब बनता है या फिर कम-मार्जिन वाली असेंबली डेस्टिनेशन तक सीमित रहता है।
देसी कंपनियों को मिला बल
भारत सरकार की योजनाओं का कई भारतीय कंपनी ने लाभ उठाया जिनमें Greencore Electronics का नाम भी शामिल है। इस कंपनी ने ADAS की बढ़ती मांग को समझते हुए भारत में प्रमुख कार, ट्रक और भारी निर्माण वाहन निर्माता के लिए सप्लायर के रूप में कनेक्टेड और ऑटोनॉमस व्हीकल सेगमेंट के लिए ADAS Sensors, Ultrasonic Sensors, Radar Sensors और LiDAR Sensors के विकास में निवेश किया है।
कंपनी के संस्थापक पवन पुरी ने बताया कि भारतीय कंपनियों का दृष्टिकोण केवल विदेशी डिजाइन को भारत में स्थानीकरण करने तक सीमित नहीं है बल्कि ध्यान वाहन निर्माता, सप्लायर और अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर ऐसे समाधान को को-डिवेलप कर सड़क और मौसम के अनुरूप जांच करने का है।
जैसे-जैसे विभिन्न प्राइस सेगमेंट में ADAS से लेस वाहनों की मांग बढ़ रही है, भारतीय कंपनियां निर्माण क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ इंजीनियरिंग निवेश को भी मजबूत कर रहे हैं, ताकि इन सुरक्षा प्रणालियाँ की नींव रखने वाले सेंसर्स को भारत में ही डिजाइन, टेस्ट और निर्माण किया जा सके।