अपडेटेड 29 January 2026 at 22:49 IST

Junk Food: बच्चों में जंक फूड की लत पर सरकार सख्त, सुबह 6 से रात 11 बजे तक TV पर पिज्जा-बर्गर के विज्ञापन नहीं दिखाने की प्लानिंग

Junk Food Ad Ban: आर्थिक समीक्षा 2025-26 में जंक फूड के बढ़ते खतरों पर चिंता जताई गई है। सरकार को सुझाव दिया गया है कि सुबह 6 से रात 11 बजे तक पिज्जा, नूडल्स और कोल्ड ड्रिंक जैसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जाए।

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Junk Food Ad Ban
जंक फूड की लत पर सरकार सख्त | Image: representative

Junk Food Ad Ban: देश की अर्थव्यवस्था का लेखा-जोखा पेश करने वाली आर्थिक समीक्षा 2025-26 में इस बार केवल आंकड़ों की ही नहीं, बल्कि आम जनता की सेहत की भी बात की गई है। इसमें अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों (Ultra-Processed Foods) की बढ़ती खपत को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। 

समीक्षा के माध्यम से सरकार को सुझाव दिया गया है कि जन स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पिज्जा, बर्गर, नूडल्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे उत्पादों के विज्ञापनों पर सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाए। 

मोटापे की चपेट में युवा भारत

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, साल 2009 से 2023 के बीच प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों (UPF) के बाजार में 150 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। अगर और पीछे मुड़कर देखें तो साल 2006 में जहां इन उत्पादों की खुदरा बिक्री महज 90 करोड़ डॉलर थी, वहीं 2019 तक यह 40 गुना बढ़कर लगभग 38 अरब डॉलर तक पहुंच गई। 

यही कारण है कि देश में पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापे की दर लगभग दोगुनी हो चुकी है, जो आने वाले समय में देश के मानव संसाधन के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है। ये आंकड़े भारत में खान-पान की बदलती और बिगड़ती आदतों की एक डरावनी तस्वीर पेश करते हैं। 

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हेल्दी एवं टिकाऊ आहार को प्रोत्साहन

वर्तमान में विज्ञापन संहिता के नियम-7 और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के दिशा-निर्देश भ्रामक विज्ञापनों पर रोक तो लगाते हैं, लेकिन समीक्षा में एक बड़ी कानूनी खामी की ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भ्रामक शब्द की कोई स्पष्ट और पोषक-तत्व आधारित परिभाषा मौजूद नहीं है।

इसी अस्पष्टता का फायदा उठाकर बड़ी कंपनियां अपने उत्पादों को हेल्थ, एनर्जी या न्यूट्रिशन जैसे भारी-भरकम शब्दों के साथ बेच रही हैं। आर्थिक समीक्षा ने सुझाव दिया है कि अब पैकेट के सामने वाले हिस्से पर पोषण संबंधी स्पष्ट सूचना देना अनिवार्य किया जाए और बच्चों को लक्षित करने वाली मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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ब्रिटेन और चिली की राह पर चलेगा भारत?

भारत में जंक फूड विज्ञापनों पर नियंत्रण लगाने के लिए दुनिया के अन्य देशों के उदाहरण भी पेश किए गए हैं। ब्रिटेन ने हाल ही में बच्चों को मोटापे से बचाने के लिए रात 9 बजे से पहले टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगा दी है। वहीं, चिली और नॉर्वे जैसे देशों में भी ऐसे उत्पादों के विपणन को लेकर कड़े एकीकृत कानून लागू हैं। 

आर्थिक समीक्षा का मानना है कि केवल उपभोक्ता का व्यवहार बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए समन्वित नीतिगत कदमों की जरूरत है। इसमें पारंपरिक मीडिया के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी पाबंदियां अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है, ताकि 'स्वस्थ भारत' का सपना साकार हो सके।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 29 January 2026 at 22:49 IST