अपडेटेड 28 January 2026 at 19:06 IST
Budget 2026: PM किसान सम्मान निधि किस्त की रकम में होगा इजाफा? वित्त मंत्री निर्मला के बजट से 'धरतीपुत्र' को क्या-क्या उम्मीदें?
Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में आम बजट पेश करेंगी। इस बार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कृषि बजट को 1.5 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाए जाने और पीएम किसान योजना की किस्त में वृद्धि की प्रबल संभावना है।
- बिजनेस न्यूज
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Budget 2026: देश का आम बजट 2026 पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इस बार सबकी निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे पर टिकी हैं। विशेष रूप से ग्रामीण भारत और कृषि क्षेत्र को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। बढ़ती महंगाई और खेती की बढ़ती इनपुट लागत को देखते हुए यह माना जा रहा है कि सरकार कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन को रिकॉर्ड स्तर पर ले जा सकती है।
पिछले एक दशक में कृषि बजट जिस तरह 22 हजार करोड़ से बढ़कर 1.25 लाख करोड़ के पार पहुंचा है, उसे देखते हुए इस बार इसके 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
क्या 6000 से 8000 रुपये होगी PM किसान सम्मान निधि?
बजट 2026 को लेकर जब किसानों की बात आती है, तो फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) को लेकर हो रही है। वर्तमान में किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों में दी जाती है।
हालांकि, कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों द्वारा लगातार कहा जा रहा है कि खेती के सामान जैसे बीज, उर्वरक और डीजल के बढ़ते दामों के कारण यह राशि अब नाकाफी साबित हो रही है। इसके बाद अब ऐसी प्रबल संभावना जताई जा रही है कि वित्त मंत्री इस बार इस राशि को बढ़ाकर 8,000 रुपये सालाना करने का एलान कर सकती हैं।
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नकली बीजों से मिलेगी मुक्ति
खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार इस बजट सत्र में एक नया बीज बिल पेश करने की तैयारी में है। यह कानून कृषि क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है क्योंकि इसमें नकली और घटिया बीजों की बिक्री रोकने के लिए कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
कृषि और खाद्य निर्यात
भारत का एग्रीकल्चर एवं फूड एक्सपोर्ट्स लगभग 50-55 अरब अमेरिकी डॉलर सालाना है, लेकिन ग्लोबल ट्रेड और टैरिफ बैरियर एक अलग चुनौती बनकर उभरी हैं। बजट 2026 से एक्सपोर्ट फैसिलिटी, फास्ट अप्रूवल्स और वैल्यू एडेड कृषि उत्पादों के लिए समर्थन पर ध्यान देने की उम्मीद है, जिससे किसानों और कृषि कंपनियों को टैरिफ के दबाव के बावजूद ग्लोबल मार्केट में बेहतर पहुंच मिल सके।
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इनपुट लागत में कमी और एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
किसानों की एक प्रमुख मांग खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और यंत्रों पर GST दरों को कम करने की है। वर्तमान में कीटनाशकों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिसे घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग जोर पकड़ रही है। इसके अतिरिक्त, बजट में पोस्ट-हार्वेस्ट लॉजिस्टिक्स और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी निवेश की संभावना है।
'फिजिटल' मॉडल यानी फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर फसल की बर्बादी कम करने और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि वैश्विक बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की पैठ भी मजबूत होगी।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 28 January 2026 at 19:06 IST