अपडेटेड 29 January 2026 at 16:25 IST

Economic Survey 2025-26: मजबूत ग्रोथ, महंगाई भी काबू में, AI पर फोकस... संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे की 10 बड़ी बातें

Economic Survey 2026: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इकोनॉमिक सर्वे पेश किया है। इसमें 6.8-7.2% की GDP ग्रोथ का अनुमान, घटती महंगाई और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र किया गया। जानिए बड़ी बातें...

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Economic Survey 2025-26
Economic Survey 2025-26 | Image: Republic

Economic Survey 2026: रविवार (1 फरवरी) को पेश होने वाले बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में  इकोनॉमिक सर्वे (आर्थिक सर्वेक्षण) 2025-26 पेश कर दिया। यह भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति, प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट है। इसमें बताया गया कि बीते एक साल में देश की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कैसा रहा। साथ ही आने वाले समय में हमारी विकास की रफ्तार क्या होगी?

इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, वैश्विक माहौल कमजोर बने होने के बावजूद, मजबूत घरेलू मांग के मुख्य आधार के रूप में काम करने से भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। वहीं, आर्थिक सर्वे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक अलग और विशेष चैप्टर जोड़ा गया। इसमें बताया गया है कि AI केवल भविष्य की तकनीक नहीं बल्कि यह वर्तमान में तेजी से फैलती हुई वास्तविकता बन गई है। आर्थिक सर्वेक्षण में सोने-चांदी को लेकर खास जिक्र किया गया है।

आइए संसद में पेश किए गए इस आर्थिक सर्वेक्षण की बड़ी बातें जानते हैं...

GDP ग्रोथ का मजबूत अनुमान

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए फर्स्ट एडवांस एस्टिमेट के अनुसार रियल जीडीपी ग्रोथ 7.4% और GVA ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान है। भारत लगातार चौथे साल दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

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अगले साल (FY27) के लिए ग्रोथ प्रोजेक्शन

वित्त वर्ष 2026-27 में रियल जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। भारत की पोटेंशियल ग्रोथ क्षमता करीब 7% आंकी गई है, जो सुधारों और मजबूत बुनियादी ढांचे से संभव है।

महंगाई पर काबू

आम आदमी के लिए राहत की खबर यह है कि महंगाई काबू में है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच औसत खुदरा महंगाई दर घटकर 1.7 प्रतिशत रही, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला शुरू होने के बाद सबसे निचला स्तर है।

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विदेशी निवेश और व्यापार

सर्वे में भारत के बाहरी व्यापार और निवेश के मोर्चे पर सकारात्मक तस्वीर पेश की गई। सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश (FDI) आ रहा है। वहीं, भारत के कुल निर्यात (सामान + सेवाएं) में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

रोजगार और लेबर फोर्स में प्रगति

कुल बेरोजगारी दर 2017-18 के 6% से घटकर 2023-24 में 3.2% हुई। सर्वे में कहा गया कि साल 2017 में महिला लेबर फोर्स 23.3 फीसदी थी जो साल 2023-24 में बढ़कर 41.7 फीसदी पर पहुंच गया है। वहीं, महिलाओं में बेरोजगारी दर में भी गिरावट देखने को मिली है, जो 2017-18 में 5.6 फीसदी पर और 2023-24 में यह 3.2 फीसदी पर पहुंच गई है।

बैंकिंग में सुधार

सितंबर 2025 तक बैंकों का ग्रॉस NPA (Non-performing Assets) घटकर 2.2 प्रतिशत पहुंचा, जो कई सालों का सबसे निचला स्तर है। बैंकिंग, कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस सेक्टर मजबूत, नए रेगुलेशंस और AI फ्रेमवर्क से सपोर्ट।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर बना निर्यात का पावरहाउस

सर्वे के अनुसार भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर निर्यात का पावरहाउस बना है। वित्त वर्ष 2022 (FY22) में जो सेक्टर सातवीं सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी आता था, वह वित्त वर्ष 2025 (FY25) तक तीसरा और साथ ही सबसे तेजी से बढ़ने वाला निर्यात क्षेत्र बन गया है। आंकड़ों पर गौर करें तो वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 22.2 बिलियन डॉलर पहुंच गया है।

AI पर विशेष चैप्टर

आर्थिक सर्वे में विशेषता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक अलग चैप्टर है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अर्थव्यवस्था के स्वरूप को AI बदल रहा है। बात भारत जैसी देश की हो, जहां बड़ी युवा आबादी हैं, वहा के लिए AI विकास के नए अवसर लेकर आ रहा है और यह रोजगार और तकनीक के मोर्चे पर बड़ी चुनौती भी पेश करता है।

किसानों की आय

सर्वे में बताया कि किसानों की आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता दी गई। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के जरिए अब तक किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मदद दी जा चुकी है। सरकार का ध्यान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और फसल बीमा योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर है।

शहर विकास के इंजन

आर्थिक सर्वे 2025-26 के अनुसार भारत आर्थिक और कार्यशील मायनों में आधिकारिक परिभाषा से कहीं अधिक शहरी है। आर्थिक सर्वे ने इस बात को बनाए रखा है, विश्‍व बैंक में भी अनुमान व्‍यक्‍त किया है कि 2036 तक भारत के 60 करोड़ लोगों के घर शहर और कस्‍बों में होंगे यानी कुल जनसंख्‍या का 40 प्रतिशत, जबकि 2011 में यह  आंकडा 31 प्रतिशत था। सकल घरेलू उत्‍पाद में 70 प्रतिशत योगदान शहरी इलाकों का है।

यह भी पढ़ें: PM किसान सम्मान निधि किस्त की रकम में होगा इजाफा? वित्त मंत्री निर्मला के बजट से 'धरतीपुत्र' को क्या-क्या उम्मीदें? 

Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 29 January 2026 at 16:25 IST