'US ने जानबूझकर खुद को बनाया अकेली ताकत': म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में विदेश मंत्री का बड़ा बयान, चीन को लेकर कही ये बात
Jaishankar at Munich Leaders Meeting: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स में बदलते हालात पर म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान बात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के बदले रुख और चीन के बढ़ते प्रभाव के बारे में भी बताया।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Jaishankar at Munich Leaders Meeting: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स (वैश्विक भू-राजनीति) में बदलते हालात पर बात की। उन्होंने अमेरिका के बदलते रुख और चीन के उभार को आज के अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के दो मुख्य आधार बताया।
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में बोलते हुए जयशंकर ने "अमेरिका की स्थिति में बड़े बदलाव" का जिक्र किया, जिसके कारण वह एक तरह से “जानबूझकर एक अकेली शक्ति बन गया है” और कहा कि वैश्विक परिदृश्य में तीव्र प्रतिस्पर्धा केवल अमेरिका और चीन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे "किसी भी देश के पास मौजूद ताकत या प्रभाव का हथियार के तौर पर इस्तेमाल" होने लगा है।
US-चीन की प्रतिस्पर्धा पर क्या बोलें जयशंकर?
जयशंकर ने कहा 'आज का परिदृश्य मुख्य रूप से अमेरिका की स्थिति में आए बड़े बदलाव से तय हो रहा है। यह बदलाव उसकी अपनी पसंद का नतीजा है और एक तरह से वह जानबूझकर एक अकेली ताकत बन गया है। माहौल की दूसरी खासियत, बेशक, चीन का उभरना है । चीन , जो खुद को एक अनोखे देश के रूप में देखता है, जो एक तरह से अपनी खुद की सोच, कई मायनों में, असलियत भी है और हम बहुत कड़े मुकाबले की उम्मीद कर रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "आज यह कॉम्पिटिशन, जो सिर्फ़ इन दो देशों तक ही सीमित नहीं है, किसी भी देश के पास मौजूद किसी भी लेवरेज को हथियार बना रहा है। और यह कॉम्पिटिशन एक-दूसरे पर निर्भरता की कॉम्प्लेक्सिटी के साथ मौजूद है।"
उभरती और मध्यम शक्तियों के सहयोग पर जोर
जयशंकर ने कहा "उभरती और मध्यम शक्तियों के बीच, जहाँ तक उनके हितों का सीधा टकराव नहीं है, वे अपने अंतरराज्यीय सहयोग को मजबूत करने में रुचि रखते हैं, लेकिन यह भी स्वाभाविक है कि उनका अमेरिका और चीन के साथ सहयोग होगा।'
इस दौरान उन्होंने क्वाड का जिक्र करते हुए कहा कि कनेक्टिविटी के क्षेत्र में, हमारे पास भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और ध्रुवीय मार्ग, उत्तरी समुद्री मार्ग है।"
जयशंकर ने कहा कि BRICS उन अलग-अलग पार्टियों का उदाहरण है, जिन्हें लगता है कि उनकी सामूहिक आवाज़ अकेले की आवाज़ से कहीं ज़्यादा मज़बूत है। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में जिक्र करते हुए बताया कि दोनों ही भारत ने शुरू किए और जो बहुत सफल रहे हैं।
मल्टीपोलैरिटी के तेजी से उभरने का भी किया जिक्र
जयशंकर ने मल्टीपोलैरिटी के तेजी से उभरने का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा “यह सोचना कि देशों के ऐसे प्लेयर्स के साथ रिश्ते होंगे जिनमें तालमेल बिठाना हमेशा आसान नहीं होगा, लेकिन फिर भी यह एक सच्चाई है, देशों के लिए एक मजबूरी है।
यह हेजिंग करके आगे बढ़ने की एक तरह की स्ट्रैटेजी है फिर यह देखना होगा कि मल्टीलेटरलिज़्म के लिए इसके क्या नतीजे होंगे, जो पहले से ही दबाव में है, क्योंकि मुख्य मल्टीलेटरल बॉडी और यूनाइटेड नेशंस में साफ तौर पर गतिरोध है। इस बदलती स्थिति का एक परिणाम छोटे-छोटे समूहों के रूप में भी सामने आ सकता है।'
Published By : Sahitya Maurya
पब्लिश्ड 4 October 2026 at 18:10 IST