'ये कागजी शेर, हमें NATO की जरूरत थी, मगर...', ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर नाटो पर फिर साधा निशाना, अब ग्रीनलैंड को लेकर किया बड़ा इशारा

अपने ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने NATO की आलोचना करते हुए कहा कि जरूरत के समय वह अमेरिका के साथ खड़ा नहीं रहा। ग्रीनलैंड की याद दिलाकर बढ़ाई हलचल।

Donald Trump | Image: Reuters

ईरान के साथ एक अस्थायी संघर्ष-विराम समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर  NATO और प्रमुख सहयोगी देशों की तीखी आलोचना की है। इस बार ट्रंप ने नाटो को 'कागजी शेर' करार देते हुए ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा इशारा कर दिया। ऐसे में अब ये भी सवाल उठने लगे हैं कि ट्रंप का अगला निशाना ग्रीनलैंड तो नहीं?

अपने ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने NATO की आलोचना करते हुए कहा कि जरूरत के समय वह अमेरिका के साथ खड़ा नहीं रहा। उन्होंने NATO को ग्रीनलैंड की याद दिलाई, जिससे आर्कटिक क्षेत्र में उनकी फिर से बढ़ती दिलचस्पी का संकेत नजर आ रहे हैं।

NATO पर फिर भड़के ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा है, "जब हमें NATO की जरूरत थी, तब वे वहां नहीं थे; और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी, तो भी वे वहां नहीं होंगे। नाटो एक कागजी शेर है। लड़ाई के समय यह गठबंधन आगे आने में पूरी तरह नाकाम रहा।” उन्होंने आरोप लगाया कि सहयोगी देशों ने मदद न करने की अपनी हदें पार कर दीं।"

जापान,ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया पर साधा निशाना

ट्रंप ने कहा  NATO देशों ने न केवल सैन्य सहायता देने से इनकार किया, बल्कि लॉजिस्टिक सपोर्ट और लैंडिंग स्ट्रिप्स उपलब्ध कराने से भी मना कर दिया।जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे अमेरिका के करीबी सहयोगियों पर भी ट्रंप ने निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'जापान ने मदद नहीं की, ऑस्ट्रेलिया ने मदद नहीं की, दक्षिण कोरिया ने मदद नहीं की। लड़ाई का पूरा बोझ अकेले अमेरिका को उठाना पड़ा।' उन्होंने जोर देकर कहा कि “नाटो हम हैं।”

 ग्रीनलैंड को लेकर किया इशारा

वहीं, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के ताजा बयान ने बार फिर हलचल बढ़ा दी है। बता दें कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की ट्रंप की पिछली धमकियों ने यूरोपीय राजधानियों में हलचल मचा दी थी और अटलांटिक पार के संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था। इसके चलते यूरोपीय संघ के भीतर सुरक्षा मामलों पर अधिक एकता और स्वतंत्रता की मांग उठने लगी थी।

यूरोपीय देशों में बढ़ी हलचल

फ्रांस और जर्मनी ने यूरोपीय संघ से आग्रह किया था कि वह अपने एंटी-कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट (Anti-Coercion Instrument) को लागू करने पर विचार करे। बता दें कि  ACI एक 'व्यापार बजूका' है जो सदस्य देशों को तीसरे देशों द्वारा आर्थिक दबाव से बचाता है। यह आग्रह तब किया गया था, जब ट्रंप ने यह दावा किया था कि ग्रीनलैंड के रणनीतिक खनिज संसाधनों तक अमेरिका की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक 'ढांचागत' समझौता हो गया है।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 9 April 2026 at 08:09 IST