दुनिया की टेंशन खत्म... ईरान-अमेरिका पीस डील होते ही होर्मुज से बेखौफ गुजरने लगे जहाज, दनादन लुढ़क रहा तेल; अब शेयर बाजार लगाएगा लंबी छलांग?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुरुवार को एक उत्साहजनक तस्वीर सामने आई। सऊदी अरब के तीन विशाल तेल टैंकर, जिनमें करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल भरा था, बिना किसी रुकावट के इस संवेदनशील जलमार्ग से गुजर गए।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुरुवार को एक उत्साहजनक तस्वीर सामने आई। सऊदी अरब के तीन विशाल तेल टैंकर, जिनमें करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल भरा था, बिना किसी रुकावट के इस संवेदनशील जलमार्ग से गुजर गए। हफ्तों की तनातनी के बाद यह नजारा इस बात का संकेत था कि ईरान-अमेरिका के बीच कुछ बदल रहा है।
दरअसल, बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच एक समझौतापत्र पर दस्तखत हुए। यह समझौता तय वक्त से दो दिन पहले ही लागू हो गया। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात है। जहाज जो पिछले कुछ समय से सुरक्षा कारणों से अपना ट्रैकर बंद कर चुप-चाप चल रहे थे, अब दोबारा खुलकर समुद्री रास्तों पर नजर आ रहे हैं।
तेल बाजार पर भी दिखा असर
इसका असर तेल बाजार पर भी दिखा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। जंग के दौरान का यह सबसे निचला स्तर है। शिपिंग कंपनियां मानती हैं कि हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा क्योंकि समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों की जांच जैसे काम अभी बाकी हैं।
यह समझौता अगले 60 दिनों की बातचीत का दरवाजा खोलता है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत कई बड़े मुद्दों पर स्थायी हल ढूंढा जाएगा। फरवरी में ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ जो सैन्य अभियान शुरू किया था, अब वह एक नई दिशा में मुड़ता दिख रहा है।
लेबनान की तस्वीर अब भी डरावनी
लेकिन खाड़ी में जो राहत दिखी, वही तस्वीर लेबनान में बिल्कुल उलटी है। गुरुवार की सुबह इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान के कफरतबनित और जेबदीन कस्बों पर हमले किए। लेबनान की सरकारी एजेंसी के मुताबिक इन हमलों में तीन लोग मारे गए। राजधानी बेरूत के ऊपर भी इजरायली ड्रोन मंडराते देखे गए।
नबाटियेह से बेरूत विस्थापित हुए मोहम्मद दोगमान की बात कहती है जो लाखों लेबनानियों के मन में है: "ईरान और अमेरिका का मामला सुलझ गया होगा, लेकिन हमारी जंग खत्म नहीं हुई। हमें साफ जवाब चाहिए।" इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान से सेना हटाने का इरादा नहीं रखता। उसने एक नया नक्शा भी जारी किया जिसमें लेबनान के और इलाकों को अपने बफर जोन में दिखाया गया है। नेतन्याहू के करीबी एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को "कठिन और जिद्दी" बताया।
यही वह बिंदु है जहां ट्रंप और नेतन्याहू के बीच दरार सबसे साफ दिखती है। ट्रंप पहले ही इजरायल की उन कार्रवाइयों पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं जिनमें हिजबुल्लाह के नाम पर पूरी इमारतें तबाह की जा रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अगर ट्रंप लेबनान में युद्ध समाप्त कराने पर अड़े रहे तो इजरायल को अमेरिकी कूटनीतिक समर्थन और सैन्य दबाव, दोनों में से एक चुनना पड़ सकता है। ईरान के आलोचक यह भी कह रहे हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में तेहरान ने न सिर्फ अपना वजूद बचाए रखा, बल्कि होर्मुज पर पकड़ का इस्तेमाल कर प्रतिबंधों में बड़ी रियायत भी हासिल कर ली। खाड़ी में शांति की एक तस्वीर जरूर बनी है, पर पूरा कैनवास अभी रंगहीन है।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 18 June 2026 at 23:37 IST