चंद घंटे पहले बातचीत से इनकार, फिर 34 साल बाद ट्रंप ने दो दुश्मन देशों को वार्ता के लिए कैसे किया तैयार? इजरायल-लेबनान सीजफायर की INSIDE STORY
तेहरान ने बार-बार यह मांग की है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह को निशाना बनाकर इजरायल द्वारा किए जा रहे बड़े हमलों को रोका जाए।
तेहरान ने बार-बार यह मांग की है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह को निशाना बनाकर इजरायल द्वारा किए जा रहे बड़े हमलों को रोका जाए। पिछले सप्ताहांत अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत के विफल रहने के बाद, इस संघर्ष-विराम को करवाने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका, दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाल करने और उन्हें फिर से बातचीत की मेज पर लाने में अहम साबित हो सकती है।
आपको बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल और लेबनान के बीच 10-दिन के संघर्ष-विराम की घोषणा, ईरान के साथ शांति समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
सीजफायर की पूरी स्टोरी
7 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा के बाद, इजरायल ने लेबनान में ईरानी प्रॉक्सी गुटों के खिलाफ अपनी बमबारी जारी रखी। तेहरान ने इस कदम को युद्धविराम का उल्लंघन बताया और कहा कि इससे अमेरिका के साथ हुआ नाज़ुक युद्धविराम खतरे में पड़ सकता है।
अमेरिका और इजरायल ने जोर देकर कहा कि लेबनान कभी भी ईरान के साथ हुए युद्धविराम का हिस्सा नहीं था, और दावा किया कि तेहरान की तरफ से "गलतफहमी" हुई थी। लेकिन पर्दे के पीछे, ट्रंप के अधिकारी इजरायल पर अपना हमला रोकने का दबाव बना रहे थे, क्योंकि उन्हें चिंता थी कि इससे ईरान के साथ उनके शांति प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है।
खुद ट्रंप ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू कराने की पहल की थी, और बुधवार देर रात एक पोस्ट में लिखा था, "मैं इजरायल और लेबनान के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहा हूं। दोनों देशों के नेताओं ने बहुत लंबे समय से, लगभग 34 साल से, आपस में बात नहीं की है।"
युद्धविराम की घोषणा के बाद, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को शांति वार्ता के लिए व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया है; यह 34 साल में पहली बार होगा जब इन दोनों देशों के नेता सीधे तौर पर आपस में बातचीत करेंगे।
लेबनान के राष्ट्रपति ने नेतन्याहू से बात करने से किया था इनकार
इससे पहले आउन ने नेतन्याहू से सीधे बात करने से इनकार कर दिया था। ऐसा होने पर दशकों बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच यह पहली सीधी बातचीत होती। लेबनान के अधिकारियों ने इजरायल और अमेरिका से कहा था कि जब तक लेबनान और हिज्बुल्लाह के बीच युद्धविराम नहीं हो जाता, तब तक वे आगे कोई बातचीत नहीं करेंगे।
इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। इसके बाद लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत की। दोनों के साथ बात करने और उन्हें मनाने के बाद ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान कर दिया।
अब लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि उन्होंने आज पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस संघर्ष-विराम की घोषणा का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य इजरायल और लेबनान के बीच शत्रुता को रोकना है।
X पर एक पोस्ट में, उन्होंने उन देशों को धन्यवाद दिया जिन्होंने लेबनान में संघर्ष-विराम कराने की कोशिश की है, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, सऊदी अरब, मिस्र, कतर और जॉर्डन शामिल हैं।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 16 April 2026 at 23:34 IST