Russia Sanctions Bill: डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध वाला बिल किया साइन, रूस से तेल खरीदना चीन-भारत को पड़ेगा महंगा; अमेरिका लगाएगा 100% टैरिफ?
Russia Sanctions Bill: डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला बिल साइन कर दिया है, जो अब कानून बन चुका है। इसके तहत अब ट्रंप चीन और भारत पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
- 3 min read
Donald Trump Signs Russia Sanctions Bill into Law: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध से जुड़े कानून पर हस्ताक्षर कर दिया है। इसका मकसद रूस और उससे बड़ी मात्रा में तेल-गैस खरीदने वाले देशों जैसे चीन और भारत पर भारी शुल्क लगाना है।
दरअसल, अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस के अधिकारियों और आर्थिक क्षेत्रों पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल को मंजूर कर लिया था। हाउस में बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट बड़े थे। इसके बाद इस बिल को साइन के लिए व्हाइट हाउट भेजा गया था। ऐसे में शुक्रवार (18 सितंबर) को ट्रंप ने 'लिंड्से ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को कानून बना दिया।
100% टैरिफ वाला बिल साइन
व्हाइट हाउस के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को एचआर 5334 को कानून बनाया है जो रूस पर प्रतिबंध, टैरिफ और अन्य पाबंदियों का दायरा बढ़ाता है। वहीं, यह कानून ईरान पर पहले से लगे प्रतिबंधों को आगे बढ़ाता है।
जिनपिंग के अमेरिका दौरे से पहले ट्रंप का झटका
ट्रंप ने इस बिल पर ऐसे समय पर साइन किए हैं जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका दौरे पर रहने वाले हैं। जिनपिंग व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, टैरिफ, ताइवान, ईरान युद्ध और अमेरिका चीन के बीच चल रही व्यापारिक सहमति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। हालांकि, उससे पहले ही ट्रंप का बिल पर साइन चीन पर दबाव बढ़ाने वाला है।
भारत ने अपना रुख किया स्पष्ट
वहीं, इस मुद्दे पर भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। भारत सरकार ने कहा कि वह इस मामले में बारीकी से नजर बनाए हुए है। भारत ने दोहराते हुए कहा कि वह पहले कई दफा कह चुका है कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए भारत अलग-अलग स्रोतों (देशों) से तेल और गेस खरीदता रहेगा और बदलते बाजार के हालात के आधार पर निर्णय लेता रहेगा।
अमेरिका का असल मकसद क्या?
बता दें कि यह बिल, जो अब कानून बन चुका है- दिवंगत सीनेटर लिंहसे ग्राहम के नाम पर है। उन्होंने इस प्रस्ताव को तैयार करने में एक साल से ज्यादा का समय लिया था। अमेरिका का असल मकसद भारत को टारगेट करना नहीं है, बल्कि उसके निशाने पर रूस है। अमेरिका का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बनाना है, ताकि उसे यूक्रेन युद्ध से पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। इस कानून के तहत, रूस के अधिकारियों, बैंकों के साथ ही रूस के उस 'शैडो फ्लीट' पर भी कार्रवाई का रास्ता बनाया गया है जिसमें ऐसे टैंकर शामिल हैं जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है।
Published By : Priyanka Yadav
पब्लिश्ड 19 September 2026 at 07:22 IST