EXPLAINER/ सठिया गए ट्रंप... भारत के आम लोगों पर पड़ेगी टैक्स की मार, कंपनियों पर क्या होगा असर? दवाओं पर 100% टैरिफ के ऐलान से दुनियाभर में हड़कंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान कर दिया है। जानकारों का मानना है कि इस ऐलान से सबसे ज्यादा असर भारत और भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा।

US Tariff | Image: Republic

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान कर दिया है। जानकारों का मानना है कि इस ऐलान से सबसे ज्यादा असर भारत और भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा।

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए इस ऐलान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक अक्टूबर से विदेशी दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो जाएगा।

भारत पर क्या होगा असर?

अमेरिका भारत का दवा उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। भारतीय दवा निर्यात संवर्धन परिषद (Pharmaceuticals Export Promotion Council of India) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में भारत के 27.9 अरब डॉलर मूल्य के दवा निर्यात में से 31 प्रतिशत या 8.7 अरब डॉलर (7,72,31 करोड़ रुपये) अमेरिका को गए। 2025 की पहली छमाही में ही 3.7 अरब डॉलर (32,505 करोड़ रुपये) मूल्य के दवा उत्पादों का निर्यात किया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, भारत अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली 45 प्रतिशत से अधिक जेनेरिक और 15 प्रतिशत बायोसिमिलर दवाओं की आपूर्ति करता है। डॉ. रेड्डीज, अरबिंदो फार्मा, जाइडस लाइफसाइंसेज, सन फार्मा और ग्लैंड फार्मा जैसी कंपनियां कथित तौर पर अपने कुल राजस्व का 30-50 प्रतिशत अमेरिकी बाजार से कमाती हैं।

हालांकि, नए अमेरिकी टैरिफ मुख्य रूप से ब्रांडेड और पेटेंट प्राप्त दवाओं को टारगेट करते हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिस पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभुत्व है। फिर भी इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या भारत की जटिल जेनेरिक और विशेष दवाइयां भी जांच के दायरे में आएंगी।

इसके अलावा आपको ये भी बता दें कि अमेरिकी कस्टमर्स भारत में निर्मित कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं पर निर्भर हैं। हाई टैरिफ से देश में कीमतों में वृद्धि, महंगाई और दवाओं की कमी होगी। 

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर क्या लिखा?

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, '1 अक्टूबर, 2025 से हम किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाएंगे, जब तक कि कोई कंपनी अमेरिका में अपना दवा निर्माण संयंत्र स्थापित नहीं कर रही हो। "निर्माण" का अर्थ होगा, "भूमिपूजन" और/या "निर्माणाधीन"। इसलिए, अगर निर्माण शुरू हो गया है, तो इन दवा उत्पादों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!'

जानकारों का कहना है कि अमेरिका अभी भी ज्यादातर दवाओं और उनकी सामग्री के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहेगा, क्योंकि दवा उद्योग दुनिया भर में फैला हुआ है। दवाओं के कई हिस्से और तैयार दवाएं अलग-अलग देशों में बनती हैं।

ट्रंप ने जेनेरिक (सस्ती) दवाओं के आयात पर कोई अतिरिक्त टैक्स लगाने की बात नहीं की। जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा होता, तो दवाओं की कमी और बढ़ जाती। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को वैसे भी बहुत कम मुनाफा होता है। अगर उन पर टैक्स लगाया जाता, तो उनकी लागत और बढ़ जाती और वे अमेरिका में दवाएं बेचना ही बंद कर सकती थीं।

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 26 September 2025 at 07:58 IST