Tariff on Russia Oil: भारत-चीन को ट्रंप दे सकते हैं बड़ा झटका, रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ वाले बिल को अमेरिका के 60 सीनेटर्स ने किया समर्थन
रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैक्स लगाने वाले अमेरिकी बिल को 60 से ज्यादा सांसदों का भारी समर्थन मिला है। इस कड़े कानून के निशाने पर भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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US Tariff on India-China: रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अब अमेरिका बड़ा एक्शन लेने जा रहा है। अमेरिकी संसद (सीनेट) में पेश किए गए 100 फीसदी तक का भारी टैरिफ वाले बिल को भारी समर्थन मिल रहा है। अमेरिका के 60 से ज्यादा सांसदों ने इस बिल को सपोर्ट किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसके पक्ष में हैं।
रूसी तेल की खरीद को लेकर लगेगा टैरिफ
60 सीनेटर्स के समर्थन के बाद बिल के पास होने की संभावना ज्यादा बढ़ चुकी है। ऐसा होता है तो भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। रूसी तेल खरीद की वजह से 100% टैरिफ लागू हो जाएगा।
14 जुलाई को पेश हुआ था संशोधन वर्जन
इस बिल को सबसे पहले दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल द्वारा पेश किया गया था। इसके शुरुआती मसौदे में रूस से तेल या गैस खरीदने वाले किसी भी देश पर सीधे 500% का भारी-भरकम टैक्स लगाने का प्रावधान था। सीनेटर लिंडसे ग्राहम के निधन के बाद 14 जुलाई को अमेरिकी सीनेटरों ने बिल का संशोधित वर्जन पेश किया। इसमें 500% टैरिफ को घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है।
किसे दी गई छूट?
इस बिल में कुछ देशों को बड़ी राहत भी दी गई है। अमेरिका द्वारा रूस से खरीदे जाने वाले यूरेनियम पर यह लागू नहीं होगा। इसके अलावा, यूरोप के उन 15 देशों को भी इस टैक्स से छूट मिलेगी, जो अपनी कुल जरूरत का 15 फीसदी से कम गैस रूस से ले रहे हैं और धीरे-धीरे इस निर्भरता को खत्म करने में जुटे हैं। इन यूरोपीय देशों पर अमेरिका कोई पेनाल्टी टैक्स नहीं लगाएगा, क्योंकि वे खुद रूस से दूरी बना रहे हैं।
इस सख्त कानून के जरिए अमेरिका असल में भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को मजबूर करना चाहता है कि वे रूस से कच्चे तेल का आयात कम करें। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इस टैक्स से जब रूस की तेल की कमाई ठप होगी, तो उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी और वह यूक्रेन युद्ध बंद करने के लिए मजबूर हो जाएगा।
भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान दुनिया के उन प्रमुख देशों में हैं, जो रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) मंगाते हैं। दूसरी तरफ, अगर रूसी नेचुरल गैस की बात करें, तो इसे खरीदने के मामले में चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम टॉप लिस्ट में शामिल हैं।
अमेरिका के 'डबल स्टैंडर्ड' पर उठ रहे सवाल
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने इस अमेरिकी कदम को "डबल स्टैंडर्ड" (दोहरा मापदंड) बताया है। भारत का कहना है कि एक तरफ अमेरिका अपने यूरोपीय सहयोगियों को रूसी गैस खरीदने पर छूट दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत को निशाना बना रहा है।
इस प्रस्तावित टैरिफ को लेकर अब नई दिल्ली में चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। भारतीय अधिकारियों की ओर से चेतावनी दी है कि अमेरिका के इस कदम से भारत और अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता मुश्किल में पड़ सकती है।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 17 July 2026 at 15:05 IST