होर्मुज के चप्पे-चप्पे में विस्फोटक, माइंस ढूंढना हुआ मुश्किल... ट्रंप का पारा हाई! ईरान बोला- अमेरिका के साथ कोई डील नहीं होगी, अगर...
अमेरिकी अधिकारियों ने अमेरिकी मीडिया को बताया है कि ईरान शिपिंग के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोल सकता, क्योंकि वह युद्ध के दौरान इस जलमार्ग में बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगों (mines) को ढूंढकर हटा पाने में असमर्थ है।
अमेरिकी अधिकारियों ने अमेरिकी मीडिया को बताया है कि ईरान शिपिंग के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोल सकता, क्योंकि वह युद्ध के दौरान इस जलमार्ग में बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगों (mines) को ढूंढकर हटा पाने में असमर्थ है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा बारूदी सुरंगों के बीच से बताए गए सुरक्षित मार्ग भी सीमित हैं, जिसकी वजह तेहरान द्वारा जलडमरूमध्य में लापरवाही से बारूदी सुरंगें बिछाना है।
इस बीच ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ का कहना है कि अगर पाकिस्तान में बातचीत के दौरान अमेरिका "इजरायल फर्स्ट" के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करता है, तो उसके साथ कोई समझौता नहीं होगा।
ईरान ने क्या कहा?
मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा, "अगर हम इस्लामाबाद में 'अमेरिका फर्स्ट' के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हैं, तो दोनों पक्षों और दुनिया के लिए फायदेमंद समझौता होने की संभावना है। लेकिन, अगर हमारा सामना 'इजरायल फर्स्ट' के प्रतिनिधियों से होता है, तो कोई समझौता नहीं होगा; हम निश्चित रूप से अपनी रक्षा पहले से भी ज्यादा जोर-शोर से जारी रखेंगे, और दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"
माइंस हटाने में क्या दिक्कत है?
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका और ईरान, दोनों के पास ही समुद्री सुरंगों (mines) को हटाने की क्षमता नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सुरंगें बह भी सकती हैं; वहीं यह भी साफ नहीं है कि ईरान ने जलमार्ग में बिछाई गई हर सुरंग का रिकॉर्ड रखा है या नहीं।
अमेरिका ने दावा किया है कि यह जलडमरूमध्य बुधवार को ही खोल दिया गया था। अमेरिका ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि ईरान ज्यादातर यातायात को रोक रहा है और टोल वसूल रहा है। पिछले कुछ दिनों में, ट्रंप ने यह स्वीकार किया कि ईरान वास्तव में जहाजों को इस मार्ग का उपयोग करने से रोक रहा था। इसके बाद राष्ट्रपति ने 'ट्रुथ सोशल' पर कई पोस्ट करके ईरान को चेतावनी भी दी।
तेहरान ने कसम खाई है कि वह तब तक यातायात को रोकता रहेगा, जब तक इजरायल अपने लेबनानी सहयोगी हिज्बुल्लाह पर हमले बंद नहीं कर देता। ईरान और पाकिस्तानी मध्यस्थों का कहना है कि यह बात संघर्ष-विराम समझौते का ही एक हिस्सा थी। अमेरिका ने कहा है कि इस मुद्दे पर "वास्तव में एक गलतफहमी" हुई थी, लेकिन साथ ही उसने इस बात पर भी जोर दिया कि उसने लेबनान को संघर्ष-विराम में शामिल करने पर कभी सहमति नहीं दी थी।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 11 April 2026 at 15:25 IST