अपडेटेड 18 March 2026 at 07:40 IST
बगदाद में फिर US Embassy पर हमला, अमेरिकी सेना का C-RAM डिफेंस सिस्टम हुआ बेअसर साबित
बगदाद के ग्रीन जोन में अमेरिकी दूतावास पर मंगलवार सुबह ड्रोन और रॉकेट से हमला किया गया था। बुधवार की सुबह एक बार फिर दूतावास को निशाना बनाया गया है। खबर है कि C-RAM डिफेंस सिस्टम इस हमले को नहीं रोक सका।
इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर बुधवार की सुबह एक बार फिर हमला किया गया। दो इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी AP को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बुधवार तड़के बगदाद में अमेरिकी दूतावास परिसर को निशाना बनाया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में दूतावास के अंदरूनी हिस्से को निशाना बनाया गया। दूतावास की रक्षा करने वाली C-RAM डिफेंस सिस्टम इस हमले को रोक नहीं पाई। यह सिस्टम आने वाले रॉकेट, तोप या मोर्टार पर 20 मिलीमीटर की गोलियां बरसाकर उन्हें नष्ट करने की कोशिश करता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका।
फिलहाल इस हमले के बारे में और कोई ज्यादा जानकारी नहीं मिली है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से भी खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
मंगलवार को भी हुआ था हमला
बगदाद के ग्रीन जोन में अमेरिकी दूतावास पर मंगलवार सुबह भी ड्रोन और रॉकेट से हमला किया गया था। C-RAM डिफेंस सिस्टम दो ड्रोन रोक सका, लेकिन तीसरा परिसर में गिरा, जहां आग और धुआं उठा। इसके बाद इराकी सुरक्षा बलों ने राजधानी के कई हिस्सों में तैनाती बढ़ा दी थी और दूतावास स्थित ग्रीन जोन को सील कर दिया था।
क्या है C-RAM डिफेंस सिस्टम?
C-RAM (Counter-Rocket, Artillery, and Mortar) अमेरिकी सेना का एक उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे मुख्य रूप से रॉकेट, आर्टिलरी गोले, मोर्टार और कभी-कभी ड्रोन जैसे कम ऊंचाई वाले खतरों को हवा में ही नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह लैंड-बेस्ड फालैंक्स (Phalanx) का वर्जन है, जो मूल रूप से जहाजों पर मिसाइलों से बचाव के लिए इस्तेमाल होता था। इसमें 20 mm M61A1 वल्कन गैटलिंग गन लगी होती है, जो 4,500 राउंड प्रति मिनट की दर से फायर करने में सक्षम है।
इसके रडार और सेंसर आने वाले प्रोजेक्टाइल को डिटेक्ट और ट्रैक करते हैं। सिस्टम खुद ही थ्रेट का आकलन करता है और ऑटोमैटिकली फायर करता है। हर पांचवां राउंड ट्रेसर होता है, जिससे आग की लकीर दिखती है।
अमेरिकी ठिकानों पर बढ़े हमले
बता दें कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद से इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ गए हैं। ईरान या ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया ग्रुप्स अक्सर ऐसे हमले करते रहे हैं। अमेरिकी दूतावास पहले भी ऐसे हमलों का निशाना बन चुका है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 18 March 2026 at 07:25 IST