यूरेनियम, डिफेंस टू इंफ्रास्ट्रक्चर... भारत-उज्बेकिस्तान के बीच तैयार हुआ 5 अरब डॉलर का रोडमैप, किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीएम मोदी ने आज उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों पक्षों ने भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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India-Uzbekistan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 30 अगस्त को ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बातचीत की। इस चर्चा के दौरान दोनों नेताओं के बीच संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर सहमति बनी। पीएम मोदी ने ऐलान किया कि भारत और उज्बेकिस्तान अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाएंगे और यूरेनियम सप्लाई के लिए एक लंबी अवधि की व्यवस्था करेंगे।
पीएम मोदी ने ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ बातचीत के बाद हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सीधे संपर्क, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
दोनों देशों की भलाई के लिए काम कर रहे- PM
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'उज्बेकिस्तान मध्य एशिया के केंद्र में है और इस क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव का भी केंद्र है। भारत और उज्बेकिस्तान की आकांक्षाओं और सोच में गहरी समानता है। युवा, इनोवेशन, समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक ‘यांगी उज्बेकिस्तान’ और ‘विकसित भारत 2047’ के केंद्र में हैं। इसी साझा विजन पर चलते हुए हम दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए लगातार काम कर रहे हैं।'
यूरेनियम की सप्लाई पर बनी बात
इसके अलावा दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इसके तहत उज्बेकिस्तान की ओर से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की आपूर्ति के लिए एक विशेष व्यवस्था तैयार की जाएगी। यह समझौता भारत की परमाणु ऊर्जा संबंधी जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीएम मोदी ने आज उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों पक्षों ने भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की। बातचीत में व्यापार और निवेश, बुनियादी ढांचा, महत्वपूर्ण खनिज, खनन, रक्षा और सुरक्षा, इनोवेशन, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, UPI सहित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने 2030 तक 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा।
मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने का फैसला किया, जो सहयोग की बढ़ती गहराई और विस्तार को दर्शाता है। दोनों नेताओं की मौजूदगी में खनन, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन और आयुर्वेद सहित कई क्षेत्रों से जुड़े कई MoU और समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। उज़्बेकिस्तान में फयाज टेपा और कारा टेपा जैसे बौद्ध स्थलों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' (इरादा पत्र) पर भी सहमति बनी।
विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई- राष्ट्रपति शावकत
वहीं उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने कहा, 'हमने आज बहुत ही सार्थक बैठक की और महत्वपूर्ण निर्णय लिए। आज हमारी सीधी और ठोस बातचीत हमारे बीच की गहरी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारों के रूप में हमारी स्थिति का प्रमाण है, जिसमें अपार आपसी संभावनाएं हैं। हमने कई संभावनाओं पर चर्चा की और हर क्षेत्र पर विचार-विमर्श करते हुए भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार किया। हमें खुशी है कि भारत ने डिजिटल इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप्स में प्रगति की है और खुद को सतत विकास में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया है। हम अपने व्यापक सहयोग को इन प्रगतिशील बदलावों के साथ जोड़ना चाहते हैं। हमने अब तक की अपनी प्रगति की बारीकी से समीक्षा की है और नए लक्ष्य निर्धारित किए हैं। मैं इन सभी क्षेत्रों को कवर करने वाले रोडमैप को अपनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता हूं।'
उन्होंने आगे कहा, 'हमारी साझेदारी गुणवत्ता के एक नए स्तर पर पहुंच गई है और एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में उभरी है। हमने हुए समझौतों के पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित तंत्र स्थापित किया है। व्यापार और आर्थिक सहयोग के संबंध में, हमने इन मामलों पर काम करने के लिए समर्पित टीमें तैनात करने का निर्णय लिया है। हमने पिछले दो दिनों में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की है, और हमने अपने-अपने विदेश मंत्रियों की देखरेख में काम करने वाले ढांचों के प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए तंत्र स्थापित किए हैं। हमने उन मुद्दों पर भी चर्चा की जो हमें नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे- ऐसे लक्ष्य जिन्हें हम अपनी टीमों के साथ करीबी समन्वय के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह विशेष रूप से प्रमुख भारतीय कंपनियों द्वारा शुरू की गई निवेश परियोजनाओं के लिए प्रासंगिक है।'
Published By : Priyanka Yadav
पब्लिश्ड 30 August 2026 at 17:56 IST