ईरान के पूर्व राष्ट्रपति और इजरायल के बीच क्या पक रहा था? मोसाद चीफ के साथ सीक्रेट मीटिंग का खुलासा, तेहरान ने किया हाउस अरेस्ट
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की इंटेलिजेंस विंग ने नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की इंटेलिजेंस विंग ने नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया है। यह कार्रवाई तब की गई जब ईरानी अधिकारियों को उनके और इजरायल के बीच गुप्त संपर्कों का पता चला। एक ग्लोबल मीडिया पब्लिकेशन ने सोमवार को इस घटना की जानकारी दी।
रिपोर्ट में ईरान के चार वरिष्ठ अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया गया है कि इजरायल ने कई सालों तक एक गुप्त ऑपरेशन चलाया, जिसका मकसद अहमदीनेजाद को एक इंटेलिजेंस एसेट के तौर पर भर्ती करना था। जांच के अनुसार, इजरायल की योजना थी कि मौजूदा सरकार को गिराने के बाद पूर्व राष्ट्रपति को फिर से ईरान का नेता बनाया जाए।
कब शुरू हुआ था ऑपरेशन?
बताया जाता है कि इस ऑपरेशन का मुख्य चरण 2024 की शुरुआत में हंगरी में हुआ था। हंगरी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुडापेस्ट में लुडोविका यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक सर्विस के रेक्टर गेरगेली डेली से कहा कि वे अहमदीनेजाद को जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में आमंत्रित करें।
बाद में डेली ने पुष्टि की कि उन्हें बताया गया था कि यह सम्मेलन अहमदीनेजाद और इजरायली इंटेलिजेंस के बीच गुप्त बैठकों के लिए एक बहाना था। डेली इस व्यवस्था के लिए सहमत हो गए; उनका मानना था कि अगर दो कट्टर दुश्मन बात करना चाहते हैं, तो बातचीत में मदद करना ही बेहतर है। पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि इजरायल की मोसाद इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रमुख डेविड बार्निया खुद इस कार्यक्रम के दौरान अहमदीनेजाद से मिलने बुडापेस्ट गए थे।
कैसे पता लगा?
ईरानी सरकार के साथ अहमदीनेजाद के मतभेद इस साल की शुरुआत में तेजी से बढ़े। फरवरी में, इजरायल के हवाई हमले में अहमदीनेजाद के घर के परिसर को निशाना बनाया गया, जिसमें उनके बॉडीगार्ड और उनकी बख्तरबंद कार चपेट में आ गए। हमले के बाद, मोसाद के एजेंटों ने कथित तौर पर अहमदीनेजाद को वहां से निकाला और एक गुप्त सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा दिया।
आखिरकार वे अस्पष्ट परिस्थितियों में उस सुरक्षित ठिकाने से चले गए और महीनों तक किसी को दिखाई नहीं दिए। वे सार्वजनिक रूप से तभी सामने आए जब ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार हो रहा था। इसके कुछ ही समय बाद, IRGC की इंटेलिजेंस विंग ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
इजरायल की मदद क्यों कर रहे थे अहमदीनेजाद?
पूर्व राष्ट्रपति के सहयोगियों का कहना है कि विदेशी इंटेलिजेंस के साथ उनका सहयोग पूरी तरह से राजनीतिक महत्वाकांक्षा से प्रेरित था, न कि आर्थिक लाभ के लिए। एक अन्य सहयोगी ने बताया कि ईरान के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से तीन बार अयोग्य ठहराए जाने के बाद अहमदीनेजाद का ईरानी राजनीतिक व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह उठ गया था। उनके मन में सरकार के नेताओं के प्रति गहरी नाराजगी थी और खबरों के अनुसार, उन्होंने अपने करीबी लोगों से कहा था कि अगर उन्हें विदेशी समर्थन से दोबारा सत्ता मिलती है, तो वे अब्राहम समझौते के जरिए इजरायल के साथ ईरान के रिश्ते सामान्य करना चाहते हैं।
मोसाद के अधिकारियों और अहमदीनेजाद के प्रवक्ता, अली अकबर जवानफेकर, दोनों में से किसी ने भी अभी तक इन खबरों की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 13 July 2026 at 21:30 IST