9/11 से पहले ओसामा बिन लादेन के हिट लिस्ट में था भारत, रच रहा था बड़े हमले की साजिश; CIA ने किया बड़ा खुलासा
CIA के रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन ने 11 सितंबर 2001 (9\11) के भीषण हमलों से काफी पहले ही भारत को निशाना बनाने की बात कही थी। 70 से अधिक खुफिया फाइलों में लादेन द्वारा भारत सहित कई अन्य देशों को अपने नेटवर्क के संभावित लक्ष्यों में शामिल करने का जिक्र है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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दुनिया को दहला देने वाले 9/11 के आतंकी हमलों से कई साल पहले हीआतंकी ओसामा बिन लादेन की बुरी नजर भारत पर भी थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इन दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि अल-कायदा का पूर्व सरगना केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारत सहित कई अन्य देशों में मौत और तबाही का खेल खेलने की साजिश रच रहा था।
CIA के खुफिया दस्तावेजों से बड़ा खुलासा
अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर, सीआईए ने 70 से अधिक 'प्रेसिडेंशियल इंटेलिजेंस ब्रीफ' जारी किए हैं। 100 से अधिक पन्नों के ये ऐतिहासिक दस्तावेज इस बात पर नई रोशनी डालते हैं कि हमलों से पहले के सालों में लादेन और उसका आतंकी नेटवर्क दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा बन चुका था। इन फाइलों के सार्वजनिक होने से अमेरिकी खुफिया रिपोर्टिंग में एक पारदर्शिता आई है।
भारत समेत इन देशों को निशाना बनाने की थी योजना
इन खुफिया दस्तावेजों में सबसे अहम 28 अगस्त, 1998 की एक रिपोर्ट है, जिसका शीर्षक 'बिन लादेन आतंकी नेटवर्क अभी भी एक खतरा' है। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि बिन लादेन भारत के खिलाफ भी बड़े आतंकी हमले करना चाहता था। भारत के अलावा इस संभावित हिट लिस्ट में पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और नाइजीरिया जैसे देश भी शामिल थे। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इस रिपोर्ट के कई अहम हिस्सों को अभी भी गुप्त रखा गया है। इसलिए, यह स्पष्ट नहीं है कि भारत में लादेन का असली निशाना क्या था या उसने हमले की कोई विशेष तारीख और विस्तृत योजना तय की थी या नहीं।
अमेरिकी हमलों के बावजूद नहीं रुका अल-कायदा
खुफिया आकलनों से यह भी पता चलता है कि अफगानिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों के बावजूद ओसामा बिन लादेन और उसके साथी सुरक्षित बच निकले थे। उनका संचार नेटवर्क पूरी तरह से काम कर रहा था और कुछ आतंकी शिविरों में तो प्रशिक्षण गतिविधियां भी दोबारा शुरू कर दी गई थीं। लादेन को पूरा भरोसा था कि वह हमलों को अंजाम देने के लिए दर्जनों देशों में फैले अपने स्लीपर सेल, कट्टरपंथी व्यक्तियों और सहयोगी आतंकी गुटों के नेटवर्क का आसानी से इस्तेमाल कर सकता है। सीआईए ने तभी आगाह कर दिया था कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में भी लादेन ने अपना मजबूत ढांचा तैयार कर लिया है, जो पश्चिमी देशों के लिए बड़ा खतरा है।
सरकारों को दी गई थी लगातार चेतावनी
इन दस्तावेजों से यह भी साबित होता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने 1998 से 2001 के बीच तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन को अल-कायदा के बढ़ते हुए खतरे को लेकर बार-बार चेताया था। एजेंसियों को पहले से ही भनक लग गई थी कि लादेन एक बहुत बड़ा वैश्विक खतरा है, जिसकी महत्वाकांक्षाएं केवल अफगानिस्तान की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं।
9/11 का वह काला दिन और उसका प्रभाव
यह संवेदनशील दस्तावेज ऐसे समय में सामने आए हैं जब 9/11 के उन खौफनाक हमलों को पूरे 25 साल हो गए हैं। आधुनिक इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमले में अल-कायदा के 19 गुर्गों ने चार अमेरिकी यात्री विमानों को हाईजैक कर लिया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के मशहूर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (ट्विन टावर) से टकराए थे, जिससे दोनों इमारतें ढह गईं। तीसरा विमान रक्षा मुख्यालय पेंटागन पर गिरा था और चौथा विमान पेंसिल्वेनिया के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, क्योंकि विमान के यात्रियों ने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया था। आपको बता दें, आज सामने सामने आए ये नए दस्तावेज इस बात पर मुहर लगाते हैं कि 9/11 से काफी पहले ही लादेन की खूनी योजनाएं वैश्विक स्तर पर फैल चुकी थीं, जिनमें भारत भी उसके खतरनाक अंतरराष्ट्रीय मंसूबों का एक संभावित लक्ष्य था।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 13 September 2026 at 11:43 IST