सीजफायर ही बनेगा युद्ध की चिंगारी? अमेरिका, ईरान और इजरायल के अलग-अलग दावे, शहबाज शरीफ तो बन गए 'पोपट'
अमेरिका और ईरान की ओर से घोषित सीजफायर महज 24 घंटे के अंदर ही धागे की तरह कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। शांति की उम्मीद पर फिर पानी फिरता दिख रहा है। युद्ध की आग अभी शांत भी नहीं हुई थी कि फिर से भड़कती नजर आ रही है।
मिडिल ईस्ट में बीते 40 दिनों से जारी भीषण जंग के खत्म होने की आश उस समय जगी, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अस्थाई युद्ध विराम की घोषणा की। ट्रंप ने ईरान को दिए अपने आखिरी अल्टीमेटम के खत्म होने के कुछ घंटे पहले सीजफायर का ऐलान किया। ट्रंप के इस ऐलान के बाद दुनिया ने थोड़ी राहत की सांस ली थी। कच्चे तेल की कीमतें थड़ाम से गिर गई, शेयर बाजार में सुधार आ गया। मगर इजरायल के एक फैसले ने पूरा पासा ही पलट दिया। युद्ध विराम की घोषणा के 24 घंटे के अंदर ही पूरी कहानी बदल गई।
अमेरिका और ईरान की ओर से घोषित सीजफायर महज 24 घंटे के अंदर ही धागे की तरह कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। शांति की उम्मीद पर फिर पानी फिरता दिख रहा है, जबकि तीनों धुरों अमेरिका, इजरायल और ईरान के बयान पूरी तरह अलग-अलग दिशा में जा रहे हैं। 'अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग' वाली कहानी नजर आ रही है। इन सबके बीच सबसे बड़ा 'पोपट' कोई बना, तो वो हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ।
इजरायल के एक फैसले ने पलटा खेल
दरअसल, सीजफायर समझौते की स्याही सूखने से पहले ही इजरायल ने इसमें एक बड़ी खामी का हवाला देते हुए लेबनान पर अपने सैन्य अभियान जारी रखने का ऐलान कर दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीजफायर के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद एक के बाद कई बयान जारी कर साफ कर दिया कि लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमला जारी रहेगा।
लेबनान पर कहर बनकर टूटा इजरायल
नेतन्याहू ने आधिकारिक बयान में सख्ती से कहा कि इजरायल राष्ट्रपति ट्रंप के उस फैसले का समर्थन करता है जिसमें ईरान के खिलाफ दो हफ्ते के लिए हमले रोकने की बात कही गई है। मगर लेबनान में हिजबुल्लाह के हमले एक अलग मोर्चा हैं और इजरायल वहां अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। इसका मकसद हिजबुल्लाह से होने वाले खतरे को बेअसर करना है, जिसे ईरान का समर्थन हासिल है।
इस ऐलान के तुरंत बाद IDF ने दक्षिणी लेबनान पर एयर स्ट्राइक कर दिया। इजरायल ने बुधवार को लेबनान पर पिछले कई दिनों की तुलना में कहीं अधिक तेज और व्यापक हमले किए। इन हमलों में 100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। बड़ी-बड़ी इमारतों को निशाना बनाया। लेबनान के टायर जिले (Tyre) के अल-कलैलाह शहर में सबसे ज्यादा नुकसान की खबर है।
नेतन्याहू के फैसले पर शहबाज शरीफ बन गए 'पोपट'
इजरायल के इस ऐलान ने शहबाज शरीफ को कूटनीतिक रूप से मुश्किल स्थिति में डाल दिया क्योंकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद को इस सीजफायर का मध्यस्थ बताते हुए दावा किया था कि यह युद्धविराम 'लेबनान सहित सभी क्षेत्रों में लागू होगा' जहां संघर्ष जारी है। ईरान ने भी इस फैसले पर हामी भरी और सीजफायर के कुछ शर्ते के साथ तैयार हुआ। मगर इजरायल ने अपने इरादे दुनिया के सामने जाहिर कर दिया।
इजरायल की कार्रवाई से बौखलाया ईरान
ईरान की इस कार्रवाई पर ईरान बौखला उठा। हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘अगर लेबनान पर एक भी इजरायली हमला हुआ तो पूरा सीजफायर समझौता समाप्त माना जाएगा।’ ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि, 'गेंद अब आपके पाले में है।' ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अगर हमले नहीं रुके तो उसके समर्थित गुट बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। इन हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को भी बंद करने की धमकी दी।
होर्मुज बंद करने के ऐलान पर भड़के ट्रंप
ईरान की चेतावनी पर अब ट्रंप बौखला उठे और उन्होंने साफ कर दिया कि युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है और अमेरिकी सेना अपनी असली जीत का इंतजार कर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में लिखा, ‘अमेरिका के सभी जहाज, विमान, सैनिक और अतिरिक्त हथियार ईरान के आसपास तब तक बने रहेंगे, जब तक असली समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता। अगर समझौता टूटा तो ऐसी गोलीबारी शुरू होगी जो पहले कभी नहीं देखी गई।’
सीजफायर ही बनेगा युद्ध की चिंगारी?
ट्रंप ने आगे कहा, 'ईरान परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं होगा, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा। ऐसा नहीं होता है तो हमारी सेना पूरी तरह तैयार है और अगली बड़ी जीत का इंतजार कर रही है। अमेरिका लौट आया है!' ट्रंप की इस वार्निंग के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि जिस सीजफायर से मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद जगी थी वही अब फिर से युद्ध की चिंगारी न बन जाए?
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 9 April 2026 at 14:14 IST