'आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है, कोई अच्छा-बुरा नहीं', UN में भारत का सख्त संदेश, PM मोदी के मैसेज को दोहराया
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने साफ संदेश दिया कि दुनिया को अब ‘अच्छे-बुरे आतंकवादी’ वाली सोच पूरी तरह त्याग देनी चाहिए। आतंकवाद की वजह से हमारे लोगों को जान गंवानी पड़ी है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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India at UN: भारत ने आतंकवाद के मुद्दे को लेकर दुनिया के दोहरे रवैये पर फिर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है- इसमें कोई अच्छा या बुरा नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को किसी भी बहाने, शिकायत या राजनीतिक हित के आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता।
UN में संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति की 9वीं समीक्षा को अपनाए जाने के दौरान भारत ने अपना पक्ष रखा। पी. हरीश ने UN में भारत की ओर से साफ संदेश दिया कि दुनिया को अब ‘अच्छे-बुरे आतंकवादी’ वाली सोच पूरी तरह त्याग देनी चाहिए। आतंकवाद की वजह से हमारे लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इससे भारत का एक रुख बना कि आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
भारत ने की क्या मांग?
पी. हरीश ने कहा कि भारत ने साल 2006 में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (CCIT) अपनाने की मांग की थी। इस संधि को अपनाना इसलिए जरूरी है जिससे आतंकवादियों और उनके समर्थकों को सुरक्षित ठिकानों, फंडिंग और हथियारों की आसानी से पहुंच न मिल सके। अब CCIT को अमल में लाने के लिए सभी देशों को राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने का समय आ गया है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ कुछ प्रमुख प्राथमिकताएं रखी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को काउंटर-टेररिज्म में दोहरे मापदंडों को पूरी तरह खत्म करना चाहिए। आतंकवाद के अपराधियों, आयोजकों, फाइनेंसर्स और स्पॉन्सर्स को जवाबदेह ठहराना और उन्हें सजा दिलाना हर देश की जिम्मेदारी है। सभी सदस्य देशों को इसमें पूरा सहयोग देना चाहिए।
'FATF के मानकों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी'
इसके अलावा यह भी कहा कि आतंकवाद की फंडिंग का मुकाबला हमारी सामूहिक लड़ाई का केंद्र होना चाहिए। वित्तीय खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान बढ़ाना चाहिए और FATF के मानकों को सख्ती से लागू करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी क्षेत्र आतंक की फंडिंग के लिए सुरक्षित ठिकाना न बने।
उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन नई उभरती टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग कर रहे हैं, जैसे एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, ड्रोन, ऑटोनॉमस हथियार, सोशल मीडिया, ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक, वर्चुअल एसेट्स और डार्क वेब। इनके खिलाफ तुरंत प्रभावी नियमन और सुरक्षा ढांचा तैयार करने की जरूरत है।
साथ ही पी. हरीश ने यह भी कहा कि आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्हें सम्मान, आवाज और उचित पुनर्वास देने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत किया जाना चाहिए।
PM मोदी के मैसेज को दोहराया
उन्होंने यह भी आगे कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को भी दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था, “कहीं भी आतंकवाद, हर जगह शांति के लिए खतरा है।”
भारत ने पूरी दुनिया से आह्वान किया कि आतंकवाद के मामले में किसी भी तरह की अस्पष्टता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण भविष्य का अधिकार है। इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा को नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 2 July 2026 at 10:18 IST