अपडेटेड 20 March 2026 at 21:37 IST

दुनिया भर में थर्ड वर्ल्ड वॉर की आशंका... तो जानिए कौन था वो अमेरिकी राष्ट्रपति जिसने जापान के 2 शहरों पर परमाणु बम गिराने का लिया फैसला

Iran-Israel War: आज जब दुनिया के कई कोनों में युद्ध की लपटें उठ रही हैं, तो चर्चा का केंद्र अक्सर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां और उनके बयान होते हैं। जिसने वैश्विक संतुलन को हिला कर रख दिया है और इससे तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के उस सबसे खौफनाक फैसले के पीछे कौन था? आइए जानते हैं।

Iran Israel War | Image: Meta\AP\Social Media

Iran-Israel War: ईरान और इजराइल और अमेरिका की अगर वर्तमान स्थिति को देखा जाए तो अभी इस युद्ध का 21वां दिन है। पूरी दुनिया की नजरें अभी इस बात पर टिकी है कि क्या अब तीसरा वर्ल्ड वॉर होने वाला है? आपको बता दें, डोनाल्ड ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान 'ईरान न्यूक्लियर डील' से बाहर निकलने और जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या जैसे फैसलों ने ईरान और अमेरिका के रिश्तों में वो कड़वाहट पैदा की, जिसके कारण आज इजराइल-ईरान युद्ध के रूप में देख रही है।

तीसरे विश्व युद्ध की ओर अगर रूख बदलता है तो इसका कारण डोनल्ड ट्रंप को माना जा सकता है। वहीं अगर इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो हमें 1945 के उस मंजर पर ले जाता है, जिसने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने का वो क्रूर फैसला लिया था। आइए जानते हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के उस सबसे खौफनाक फैसले के पीछे कौन अमेरिकी राष्ट्रपति था।

हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराने का फैसला किसका? 

अगर आज के तनाव के लिए ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने का वो क्रूर फैसला अमेरिका के 33वें राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन का था।

कौन थे हैरी एस. ट्रूमैन और उन्होंने ऐसा क्यों किया?

अप्रैल 1945 में फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट की अचानक मृत्यु के बाद ट्रूमैन ने राष्ट्रपति का पद संभाला था। उस समय द्वितीय विश्व युद्ध अपने अंतिम चरण में था, लेकिन जापान आत्मसमर्पण करने को तैयार नहीं था।
ट्रूमैन के सामने केवल दो रास्ते थे या तो वे जापान पर जमीनी हमला करते, जिसमें लाखों अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का अंदेशा था या फिर उस गुप्त हथियार का उपयोग करते जिसे 'मैनहट्टन प्रोजेक्ट' के तहत विकसित किया गया था और वो परमाणु बम था।

जापान के दो शहरों पर परमाणु बम गिराने का फैसला 

ट्रूमैन ने तर्क दिया था कि यदि अमेरिका जापान पर जमीनी हमला करता, तो लाखों अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती थी। युद्ध को तुरंत समाप्त करने के लिए उन्होंने 'मैनहट्टन प्रोजेक्ट' के तहत विकसित परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की मंजूरी दी। 
6 अगस्त 1945 में अमेरिका ने हिरोशिमा पर यूरेनियम बम गिराया। जिसमें लगभग 80,000 लोगों ने अपनी जान गवां दी। वहीं 9 अगस्त 1945 में  ठीक तीन दिन के बाद नागासाकी पर प्लूटोनियम बम गिराया गया। जिसमें लगभग  40,000 लोग मारे गए।

15 अगस्त 1945 में हुआ था द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त 

जापान ने 15 अगस्त 1945 को आत्मसमर्पण कर दिया और द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया, लेकिन कानूनी और औपचारिक रूप से युद्ध 2 सितंबर 1945 को समाप्त माना जाता है। 

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 20 March 2026 at 21:21 IST