अपडेटेड 20 March 2026 at 19:25 IST
World Sparrow Day 2026: विलुप्त हो रही नन्ही गौरैया... PM मोदी ने साझा की इसकी खासियत और संरक्षण के तरीके, VIDEO
World Sparrow Day 2026: 20 मार्च 2026 को दुनिया भर में 'विश्व गौरैया दिवस' मनाया जा रहा है। एक समय हमारे घरों के आंगन में चहकने वाली गौरैया आज तेजी से विलुप्त होने की कगार पर है। जिसे लेकर पीएम मोदी ने गौरैया के संरक्षण करने के बारे में भी संदेश दिया है।
- भारत
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World Sparrow Day 2026: कभी हमारे घरों के आंगन, छतों और रोशनदानों में अपनी चहचहाहट से सुबह की शुरुआत करने वाली नन्हीं गौरैया आज शहरों के कंक्रीट के जंगलों में कहीं खो गई है। 20 मार्च 2026 को दुनिया भर में 'विश्व गौरैया दिवस' मनाया जा रहा है। जिसे लेकर पीएम मोदी ने भी एक वीडियो के जरीए संदेश दिया है कि गौरैया को कैसे बचाया जा सकता है। क्योंकि आजकल बच्चे गैरैया चीड़िया को केवल फोटो और वीडियो में ही देख पाते हैं।
PM मोदी ने याद किया बचपन का वह साथी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए। उन्होंने गौरैया के साथ मानवीय जुड़ाव को रेखांकित किया। पीएम ने कहा कि 'गौरैया सिर्फ एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे बचपन की यादों का एक अभिन्न हिस्सा है। आज की पीढ़ी के कई बच्चों ने इसे केवल तस्वीरों में देखा है। यह हमारे इको सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर गौरैया हमारे आसपास है, तो समझ लीजिए कि हमारा पर्यावरण सुरक्षित है।'
विलुप्ति की कगार पर क्यों है गौरैया?
आज के फ्लैट्स और शीशे वाली इमारतों में गौरैया के लिए घोंसला बनाने के लिए पुरानी दीवारों जैसी जगह या रोशनदान नहीं बचे हैं। खेती और बगीचों में अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग से वे छोटे कीड़े खत्म हो गए हैं, जिन्हें खाकर गौरैया अपने बच्चों को पालती थी। इतना ही नहीं, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के कारण पक्षियों की दिशा खोजने की क्षमता प्रभावित हो रहा है।
गौरैया को कैसे बचाएं?
- अपने बालकनी या छत पर लकड़ी के छोटे बॉक्स लगाएं। चेन्नई के 'कूडुगल ट्रस्ट' जैसे संगठनों ने हजारों बच्चों को ऐसे घोंसले बनाना सिखाया है।
- गर्मियों के इस मौसम में मिट्टी के सकोरों में पानी और बाजरा या अनाज के दाने जरूर रखें।
- अपनी सोसायटियों में ऐसे पेड़-पौधे लगाएं जो पक्षियों को आवास प्रदान कर सकें।
- अपने बगीचों में ऑर्गैनिक खाद का प्रयोग करें। ताकि पक्षियों को कोई नुकसान न हो।
गौरैया को अलग-अलग राज्यों में क्या बुलाते हैं?
पंजाबी में चिड़ी। गुजरात में चकली। मराठी में चिमणी। बंगाल में चोड़ुइ पाखी। तेलुगु में पिचुक। तमिलनाडु में चित्तुकुरुवी। केरल में कुरुवी और कर्नाटक में गुब्बच्ची नाम से बुलाते हैं।
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Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 20 March 2026 at 19:20 IST