ईरान के बाद अब ब्राजील और अमेरिका के बीच बढ़ी टेंशन, राष्ट्रपति लूला डोनाल्ड ट्रंप से क्यों करना चाहते हैं सीधी बात?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका के साथ संबंध लूला के संभावित चौथे कार्यकाल के लिए सबसे बड़ी विदेशी नीति चुनौतियों में से एक साबित हो सकते हैं। सरकार खासकर ब्राजील की चुनावी प्रक्रिया में विदेशी प्रभाव की आशंका को लेकर चिंतित है। अधिकारियों के अनुसार कोई भी संभावित हस्तक्षेप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से सक्रिय चरमपंथी समूहों के जरिए हो सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज को लेकर तनाव चरम पर है। हालांकि पहले की तरह मिडिल ईस्ट में मिसाइल अटैक तो नहीं हो रहा है लेकिन जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन होर्मुज पर अपना पूर्ण नियंत्रण का दावा करते हैं जबकि ईरान इसका खंडन करता है। दुनिया की नजरें दोनों देशों की गतिविधियों पर टिकी है। लेकिन अब ब्राजील और अमेरिका के बीच भी तनाव बढ़ता जा रहा है। इस तनाव के बीच ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीच करने की इच्छा जताई है।
राष्ट्रपति लूला क्यों चाहते हैं ट्रंप से बातचीत?
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधी बातचीत करना चाहते हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ब्राजीलियाई राष्ट्रपति भवन के एक सूत्र के अनुसार यह वार्ता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ऐजेंडे से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित होगी। यह पहल दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक और राजनीतिक तनाव के बीच आई है।
दोनों देशों के बीच माहौल हुआ तनावपूर्ण
राष्ट्रपति लूला और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन कॉल उस समय प्रस्तावित है जब ब्रासीलिया और वाशिंगटन के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हैं। हालांकि बातचीच की कोई निश्चित तारीख तय नहीं है। अमेरिकी प्रशासन फिलहाल मिडिल ईस्ट संघर्ष समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। लूला पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे ट्रंप से बात करके ब्राजील के आगामी राष्ट्रपति चुनावों में वाशिंगटन के संभावित हस्तक्षेप को रोकना चाहते हैं। उनका यह प्रयास चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से हालिया फोन वार्ताओं के तुरंत बाद सामने आया है।
लूला के चौथे कार्यकाल के लिए बड़ी चुनौती
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका के साथ संबंध लूला के संभावित चौथे कार्यकाल के लिए सबसे बड़ी विदेशी नीति चुनौतियों में से एक साबित हो सकते हैं। सरकार खासकर ब्राजील की चुनावी प्रक्रिया में विदेशी प्रभाव की आशंका को लेकर चिंतित है। अधिकारियों के अनुसार कोई भी संभावित हस्तक्षेप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सक्रिय चरमपंथी समूहों के जरिए हो सकता है। फिलहाल ऐसी किसी गतिविधि की सटीक प्रकृति स्पष्ट नहीं है और कोई ठोस सबूत भी उपलब्ध नहीं है कि हस्तक्षेप हुआ हो।
दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग में साफ मतभेद
ब्राजील और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग एक और विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है। वाशिंगटन ने लैटिन अमेरिका के दक्षिणपंथी सरकारों के साथ नशीली दवाओं के खिलाफ अभियानों के नाम पर सैन्य सहयोग बढ़ाया है। इसके विपरीत ब्राजील और मैक्सिको ने ज्यादा सतर्क रुख अपनाया है। ब्राजील न्याय एवं सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय और संघीय पुलिस के माध्यम से अमेरिका के साथ सहयोग जारी रखे हुए है।
ब्राजील सरकार ने बढ़ते अमेरिकी दबाव को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। इसमें देश के कुछ चरम दक्षिणपंथी नेताओं द्वारा सैन्य हस्तक्षेप की वकालत भी शामिल है। फिर भी अधिकारी फिलहाल मानते हैं कि कोई भी संभावित हस्तक्षेप राजनीतिक और सोशल मीडिया क्षेत्र तक ही सीमित रहने की ज्यादा संभावना है।
संप्रभुता और कूटनीति का संतुलन बड़ी चुनौती
ऐसे हालात में लूला को ब्राजील की संप्रभुता की रक्षा करते हुए वाशिंगटन के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखने की नाजुक चुनौती का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति भवन का आकलन है कि यदि लूला चौथा कार्यकाल हासिल करते हैं तो ट्रंप प्रशासन के साथ संबंधों का प्रबंधन विदेश नीति की केंद्रीय प्राथमिकता बन सकता है। ट्रंप से संवाद स्थापित करने की कोशिश ब्रासीलिया की उस रणनीति को दर्शाती है, जिसमें राजनयिक चैनल खुल रखते हुए राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय संप्रुभता की मजबूती से रक्षा की जाए।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 19 August 2026 at 21:51 IST