अपडेटेड 23 January 2026 at 07:27 IST
अमेरिका ने WHO से खुद को किया अलग, जिनेवा हेडक्वार्टर से हटा लिया अपना झंडा; जानिए पूरी दुनिया पर क्या होगा ट्रंप के इस फैसले का असर?
अमेरिका ने खुद को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग कर लिया है। जिनेवा में संगठन के हेडक्वार्टर से अपने देश का झंडा भी हटा लिया है।
अमेरिका ने खुद को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग कर लिया है। जिनेवा में संगठन के हेडक्वार्टर से अपने देश का झंडा भी हटा लिया है। अमेरिका के स्वास्थ्य और विदेश विभाग ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी करके ट्रंप सरकार के फैसले की पुष्टि की और बताया कि अमेरिका अब WHO से बाहर हो गया है, लेकिन संगठन को 2380 करोड़ का बकाया चुकाएगा। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस संबंध में एक कार्यकारी आदेश साइन करके लागू कर दिया है।
आपको बता दें कि ट्रंप ने एक साल पहले अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के पहले दिन ही एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए अमेरिका के इस संगठन से बाहर निकलने के लिए नोटिस दिया था। अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन को छोड़ने से एक साल पहले नोटिस देना होता है और सभी बकाया फीस चुकानी होती है।
अमेरिका पर वर्तमान में डब्ल्यूएचओ का लगभग 260 मिलियन डॉलर (करीब 2380 करोड़ रुपये) का बकाया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस पैसे के चुकाने की संभावना कम है और विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के संगठन से बाहर निकलने से दुनिया भर में पब्लिक हेल्थ को नुकसान होगा।
अमेरिकी सरकारी फंडिंग खत्म
गुरुवार को अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने कहा कि WHO में तैनात सभी अमेरिकी सरकारी फंडिंग खत्म कर दी गई है और संगठन में तैनात सभी कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टरों को वापस बुला लिया गया है।
इसने यह भी कहा कि अमेरिका ने WHO की स्पॉन्सर कमेटियों, लीडरशिप बॉडी, गवर्नेंस ढांचे और तकनीकी वर्किंग ग्रुप में आधिकारिक भागीदारी बंद कर दी है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, 'हमारा ऑब्जर्वर के तौर पर हिस्सा लेने का कोई प्लान नहीं है और न ही दोबारा शामिल होने की योजना है।'
अमेरिका था फंड का सबसे बड़ा सोर्स
विशेषज्ञों ने अमेरिका के WHO के अलग होने के फैसले से न सिर्फ संगठन पर असर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका और पूरी दुनिया इससे प्रभावित होगी। संगठन के लिए बजट का संकट पैदा होगा। क्योंकि अमेरिका संगठन का सबसे बड़ा आर्थिक सहयोगी था और संगठन को अमेरिका से कुल फंडिंग का करीब 18 प्रतिशत फंड मिलता था, जो अब नहीं मिल पाएगा, जिस वजह से खतरों का पता लगाने, रोकथाम करने और उनका जवाब देने के लिए बनाया गया सिस्टम कमजोर होगा।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 23 January 2026 at 07:27 IST