अपडेटेड 1 January 2026 at 13:08 IST
VIRAL: 'दिल्ली-बेंगलुरु का रास्ता मत पकड़ो...', स्टार्टअप फाउंडर ने युवाओं को क्यों दी ये सलाह, सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस
VIRAL: सोशल मीडिया पर एक स्टार्टअप फाउंडर के उस पोस्ट पर बहस छिड़ गई, जिसमें उन्होंने युवाओं को दिल्ली-मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों का रूख न करके होमटाउन में रहने की सलाह दी। लोग इस पर अपनी-अपनी राय देते नजर आ रहे हैं।
Viral News: अक्सर ये देखने मिलता है कि कुछ करने की चाह में लोग अपने गांव, घर-परिवार छोड़कर शहरों का रूख करने लगते हैं। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में आईटी सेक्टर, स्टार्टअप और कॉरपोरेट नौकरियों के ज्यादातर अवसर यहीं मिलते हैं। हाल ही में एक स्टार्टअप फाउंड ने सोशल मीडिया पर इसको लेकर अपनी अलग राय रखी है। उनका कहना है कि युवाओं को दिल्ली-मुंबई का विकल्प न चुनकर अपने घर-परिवार के साथ ही रहना चाहिए। उन्होंने अपने इस विचार के पीछे की वजह भी बताई, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
रोहित आर्यन व्हाइट डस्ट के फाउंडर हैं। हाल ही में उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर बताया कि क्यों लोगों को दिल्ली-बेंगलुरु जैसे शहरों का रास्ता नहीं चुनना चाहिए। उनका मानना है कि मेट्रो सिटी में जाकर सफल होने की सोच ही गलत है।
‘दिल्ली-मुंबई जाने का मौका मिलेगा, लेकिन…’
रोहित आर्यन ने एक्स पोस्ट में लिखा, "जब आप 20s में होंगे, तो जिंदगी आपको दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या किसी दूसरे शहर में जाने या उसे चुनने का मौका देगी। इनमें से किसी को भी मत चुनना। अपने होमटाउन में रहो, कमाओ और शांति से जियो। अपने परिवार के पास या उनके साथ रहो। ऐसा नहीं है कि इन शहरों में कोई दिक्कतें है। बस मेट्रो सिटी में जाकर सफल होने की सोच ही गलत है।"
उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि बहुत से लोग इससे सहमत नहीं होंगे, लेकिन मेरा यकीन करो, लंबे समय में यह आपके लिए सबसे अच्छी चीज होगी।
सोशल मीडिया पर लोग देने लगे अपनी-अपनी राय
रोहित आर्यन के इस पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों उनका साथ देते नजर आए, तो कुछ के विचार उनसे अलग भी दिखे। वहीं कई लोग अपनी-अपनी कहानियां साझा करते नजर आए।
एक यूजर ने उनके पोस्ट पर कमेंट करते हुए कहा, "मैं पिछले 10 सालों से अपने होमटाउन सतारा में रह रहा हूं। कोई पछतावा नहीं है। जब भी मैं मीटिंग के लिए पुणे/मुंबई जाता हूं, तो ट्रैफिक में फंस जाता हूं और इस सबकी बेकार व्यवस्था से परेशान हो जाता हूं। तब मुझे एहसास होता है कि मेरे आसपास की 90% कारों और बाइकों को हर दिन यह सब झेलना पड़ता है। सतारा में, आप शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक 20-25 मिनट में जा सकते हैं। लोग मिलनसार और आरामपसंद हैं। आबादी लगभग स्थिर रहती है, क्योंकि युवा पुणे में काम करना और रहना पसंद करते हैं, जो 2 घंटे की ड्राइव पर है। बाहर जाने वालों की संख्या ज्यादा है। शॉर्ट में, यहां जिंदगी अच्छी है।"
दूसरे ने कहा, "लोग नौकरी के लिए शहरों में जाते हैं भाई। छोटे शहरों में मुंबई/दिल्ली जैसी आर्थिक मौके नहीं होते, जब तक कि आपके पास खानदानी दौलत न हो।" अन्य यूजर ने कहा, "क्या 20s की उम्र रिस्क लेने, सोशलाइज करने और खुद से सीखने का समय नहीं है? जब तक कि आप एंटरप्रेन्योरशिप के रास्ते पर न हों।" एक और यूजर ने कहा, "सही बात है। सफलता मैप पर किसी पिन से नहीं मिलती। घर से मिलने वाला सुकून, सपोर्ट और रेगुलरिटी अक्सर मेट्रो की उस भाग-दौड़ से बेहतर होती है जिसे ज्यादातर लोग रोमांटिक समझते हैं।"
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 1 January 2026 at 13:08 IST