Sawan Jal Abhishek 2026: सावन में भगवान शिव जी पर जल क्यों चढ़ाते हैं? जलाभिषेक का सही तरीका क्या है
Sawan Jal Abhishek 2026: सावन में भगवान शिव जी को जल चढ़ाना बेहद लाभकारी माना जाता है। आइए जानते हैं कि जलाभिषेक का क्या है सही तरीका।
- धर्म और अध्यात्म
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Sawan Jal Abhishek 2026: सावन मास के पावन महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान शिव भक्तों द्वारा शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है, जिसे जलाभिषेक कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में विधि-विधान से पूजा करने पर भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी प्रकार के कष्टों को दूर करते हैं।
जलाभिषेक की परंपरा
शिवलिंग पर जल चढ़ाने की यह परंपरा पौराणिक काल में हुए समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ था तब उसमें से हलाहल नामक अत्यंत भयानक विष निकला था। इस विष की उष्णता से संपूर्ण सृष्टि नष्ट होने की कगार पर आ गई थी। तब संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था। इस विष के प्रभाव से महादेव के शरीर में असहनीय जलन होने लगी, जिसे शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन पर लगातार जल अर्पित किया था। इसी मान्यता के आधार पर आज भी सावन में शिवजी पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
भगवान शिव का जलाभिषेक करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक माना गया है।
पात्र का चुनाव
शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए हमेशा तांबे या चांदी के लोटे का प्रयोग करना चाहिए। भूलकर भी स्टील या प्लास्टिक के बर्तन से शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
शुद्ध जल और गंगाजल का महत्व
शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला जल हमेशा पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए। यदि इस जल में थोड़ा सा पवित्र गंगाजल मिला लिया जाए, तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
मंत्र जाप
जल अर्पित करते समय मन ही मन या लगातार 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।
जल की धारा
शिवलिंग पर कभी भी तेज गति से या एक साथ बहुत सारा जल नहीं डालना चाहिए। हमेशा एक पतली धारा के साथ बहुत धीरे-धीरे जल अर्पित करना चाहिए।
अन्य पूजन सामग्री
जल अर्पित करने के बाद शिवलिंग पर कच्चा दूध, पंचामृत, बेलपत्र, भांग और धतूरा जैसी सामग्रियां भी श्रद्धा के साथ अर्पित की जानी चाहिए।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Kirti Soni
पब्लिश्ड 22 July 2026 at 13:55 IST