अपडेटेड 2 January 2026 at 21:43 IST

Wolf Moon On Purnima 2026: नए साल की पहली पूर्णिमा पर सूर्य के सबसे करीब होगा चांद, आसमान में नजर आएगा 'वुल्फ मून'

Paush Purnima 2026: इस दिन एक तरफ आसमान में शानदार वुल्फ मून दिखाई देगा, वहीं दूसरी ओर पौष पूर्णिमा का पावन पर्व और पृथ्वी का उपसौर होना इस दिन को और भी खास बना देता है। अगर मौसम साफ रहा, तो नए साल की शुरुआत में यह खगोलीय नजारा जरूर देखने लायक होगा।

पूर्णिमा की रात दिखेगा 'वुल्फ मून' | Image: Freepik

Purnima 2026 Supermoon: साल 2026 की शुरुआत आकाशीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास होने जा रही है। 3 जनवरी 2026 को साल की पहली पूर्णिमा पड़ रही है, जिसे वुल्फ मून कहा जाता है। इस दिन रात के आसमान में चंद्रमा सामान्य दिनों से ज्यादा बड़ा और बेहद चमकदार नजर आएगा। खगोल विज्ञान और धार्मिक, दोनों ही दृष्टि से यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या होता है वुल्फ मून?

जनवरी महीने की पहली पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा जाता है। इसके पीछे एक रोचक ऐतिहासिक कारण है। प्राचीन समय में उत्तरी गोलार्ध में कड़ाके की ठंड के दौरान भेड़ियों की आवाजें ज्यादा सुनाई देती थीं। इसी वजह से इस पूर्णिमा को वुल्फ मून नाम दिया गया।

आंखों से साफ दिखेगा वुल्फ मून

3 जनवरी की रात चंद्रमा पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब होगा। इसी कारण चंद्रमा आकार में बड़ा दिखाई देगा। उसकी चमक सामान्य से ज्यादा होगी। साफ मौसम होने पर इसे बिना दूरबीन के आसानी से देखा जा सकेगा। खुले मैदान, छत या बालकनी से वुल्फ मून को देखना एक यादगार अनुभव हो सकता है।

धार्मिक दृष्टि से भी खास है यह दिन

3 जनवरी 2026 को पड़ने वाली यह पूर्णिमा धार्मिक रूप से पौष पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा को बेहद पावन माना गया है।

इस दिन क्या किया जाता है?

गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और व्रत रखा जाता है। साथ ही, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा पर पूजा और दान करने से सुख-समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी दिन से प्रयागराज में माघ मेले की औपचारिक शुरुआत भी होती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

सूर्य के सबसे नजदीक पहुंचेगी पृथ्वी

इस दिन एक और बड़ी खगोलीय घटना भी घटित होगी। 3 जनवरी की रात लगभग 10:45 बजे पृथ्वी अपनी कक्षा में सूर्य के सबसे नजदीक बिंदु पर पहुंचेगी।इस स्थिति को खगोल विज्ञान में उपसौर कहा जाता है। इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच दूरी लगभग 14 करोड़ 70 लाख 99 हजार 894 किलोमीटर होगी। इस समय पृथ्वी अपनी कक्षा में सबसे तेज गति से घूमती है, जिसकी गति करीब 30.27 किलोमीटर प्रति सेकंड होने वाली है।

अपसौर कब होगा?

जब पृथ्वी सूर्य से सबसे ज्यादा दूर होती है, उस स्थिति को अपसौर कहा जाता है। बता दें कि साल 2026 में अपसौर 6 जुलाई को पड़ेगा।

3 जनवरी 2026 का दिन खगोल विज्ञान और धर्म दोनों के लिए बेहद खास है। एक तरफ आसमान में शानदार वुल्फ मून दिखाई देगा, वहीं दूसरी ओर पौष पूर्णिमा का पावन पर्व और पृथ्वी का उपसौर होना इस दिन को और भी खास बना देता है। अगर मौसम साफ रहा, तो नए साल की शुरुआत में यह खगोलीय नजारा जरूर देखने लायक होगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Samridhi Breja

पब्लिश्ड 2 January 2026 at 21:43 IST