अपडेटेड 25 January 2026 at 19:11 IST

Shiv Chalisa Path: सोमवार के दिन जरूर करें शिव चालीसा का पाठ, पूरी हो सकती हैं आपकी मनोकामनाएं

Shiv Chalisa Path: सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। अब ऐसे में इस दिन शिव चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी हो सकती है। आइए जानते हैं।

Shiv Chalisa Path | Image: Freepik

Shiv Chalisa Path: सनातन धर्म में भगवान शिव को 'देवों के देव महादेव' कहा गया है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोमवार के दिन शिव चालीसा का पाठ करना कितना फलदायी हो सकता है। आइए सोमवार के दिन शिव चालीसा का पाठ करने के महत्व और इसके नियम के बारे में जानते हैं।

सोमवार के दिन करें शिव चालीसा का पाठ 

अगर आप सोमवार के शिव चालीसा का पाठ करने से उत्तम परिणाम मिल सकते हैं। आप ब्रह्म मुहूर्त में चालीसा का पाठ जरूर करें।

दोहा 
श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

ये भी पढ़ें - Washing Machine Clothes: एक बार वॉशिंग मशीन में कितने कपड़े धोने चाहिए? जानें सही तरीका

सोमवार के दिन शिव चालीसा पाठ करने का महत्व 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोमवार का संबंध चंद्रमा से है। यदि किसी की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या चंद्र दोष हो, तो सोमवार को शिव चालीसा का पाठ करने से मानसिक मजबूती मिलती है और ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। अगर आपकी कोई मनोकामना है तो सोमवार के दिन इस चालीसा का पाठ करने से उत्तम परिणाम मिल सकते हैं।

सोमवार के दिन शिव चालीसा का पाठ करने के नियम 

  • यदि आप किसी विशेष मनोकामना के लिए पाठ कर रहे हैं, तो हाथ में जल लेकर अपना संकल्प दोहराएं।
  • सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें, क्योंकि किसी भी पूजा की शुरुआत उनके बिना अधूरी है।
  • पाठ करते समय अपना पूरा ध्यान शिव के स्वरूप पर लगाएं। शब्दों का उच्चारण स्पष्ट और मधुर होना चाहिए।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 25 January 2026 at 19:11 IST