अपडेटेड 24 January 2026 at 17:31 IST
Mahashivratri Kab Hai 2026: 15 या 16 फरवरी... कब रखा जाएगा महाशिवरात्रि का व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, योग और महत्व
Mahashivratri Kab Hai 2026: महाशिवरात्रि मात्र एक त्योहार नहीं, बल्कि अध्यात्म, आस्था और संकल्प का संगम है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह पावन तिथि देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के मंगलकारी विवाह का प्रतीक है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि ग्रहों की चाल से कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं, जो साधकों के लिए अत्यंत फलदायी हैं। आइए जानते हैं कि इस साल महाशिवरात्रि का व्रत कब रखा जाएगा।
Mahashivratri Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन यानी उनके विवाह का उत्सव है। हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है।
वहीं साल 2026 में महाशिवरात्रि की सही तारीख को लेकर कुछ लोगों में उलझन हो सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि व्रत किस दिन रखा जाएगा और पूजा का शुभ समय क्या है। साथ ही पूजा का महत्व क्या है? आइए विस्तार से जानते हैं।
महाशिवरात्रि 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी 2026 को होगी।
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ 15 फरवरी को सुबह 09 बजकर 12 मिनट से लेकर
- चतुर्दशी तिथि समापन 16 फरवरी को सुबह 07 बजकर 25 मिनट पर होगा।
- इसलिए शास्त्र के अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत उस दिन रखा जाता है जब चतुर्दशी तिथि 'निशीथ काल' यानी कि निशीथ काल में समाप्त होगा। इसलिए महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी 2026 को ही रखा जाएगा।
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त
- प्रथम प्रहर- शाम 06:11 से रात 09:23 तक
- द्वितीय प्रहर -रात 09:23 से मध्यरात्रि 12:35 तक
- तृतीय प्रहर -मध्यरात्रि 12:35 से सुबह 03:47 तक
- चतुर्थ प्रहर - सुबह 03:47 से सुबह 06:59 तक
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महाशिवरात्रि के दिन बन रहे हैं शुभ योग
वर्ष 2026 की महाशिवरात्रि इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन श्रवण नक्षत्र और वरियान योग का मेल हो रहा है। इसके साथ ही रविवार का दिन होने के कारण सूर्य देव की कृपा भी बनी रहेगी। इन योगों में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है और साधक को जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का महत्व क्या है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह दिन वैराग्य और गृहस्थ जीवन के संतुलन का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखद रहता है और अविवाहितों को सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 24 January 2026 at 17:31 IST