अपडेटेड 31 January 2026 at 19:32 IST
Mahashivratri 2026: फरवरी में कब है महाशिवरात्रि 2026? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भगवान शिव के चमत्कारी मंत्र
Mahashivratri 2026 Lord Shiva Puja: ज्योतिष के अनुसार, इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और मोक्ष का मार्ग खोलता है। यह महाशिवरात्रि साधकों और भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर है।
Mahashivratri 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद पवित्र और विशेष माना जाता है। यह दिन भगवान शिव की आराधना, व्रत, उपवास और रात्रि जागरण के लिए समर्पित होता है। साल 2026 में महाशिवरात्रि एक बहुत ही शुभ संयोग में आ रही है, क्योंकि इस बार यह पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र में मनाया जाएगा। ज्योतिष के अनुसार, यह दुर्लभ योग पूजा-पाठ को कई गुना फलदायी बना देता है।
महाशिवरात्रि 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी 2026 को शाम 5:04 बजे से होगी। बता दें कि तिथि का समापन अगले दिन यानी 16 फरवरी 2026 को शाम 5:34 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 यानी सोमवार को मनाई जाएगी। व्रत का पारण 16 फरवरी को किया जाएगा। व्रत पारण का समय 16 फरवरी 2026 सुबह 6:33 बजे से दोपहर 3:10 बजे तक रहेगा।
महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। कठोर तपस्या के बाद माता पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त किया और शिव ने गृहस्थ जीवन स्वीकार कर लोक कल्याण का मार्ग अपनाया। इसलिए महाशिवरात्रि को दांपत्य सुख, प्रेम, समर्पण और पारिवारिक स्थिरता का पर्व भी माना जाता है। इसके अलावा, यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था। इस दिन की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।
महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि
- सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें।
- इसके बाद केसर मिला जल अर्पित करें।
- बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल और मिठाई चढ़ाएं।
- चंदन का तिलक करें और दीपक जलाएं।
- पूरी रात दीप जलाकर रात्रि जागरण करें।
- शिव पुराण का पाठ और रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भगवान शिव के चमत्कारी मंत्र
महाशिवरात्रि के दिन इन मंत्रों का जाप विशेष फल देता है।
ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ हौं जूं सः मृत्युंजयाय नमः॥
सर्वार्थ सिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र का विशेष संयोग
इस बार महाशिवरात्रि सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रही है, जिसका अर्थ है ऐसा योग जिसमें किए गए हर शुभ कार्य की सिद्धि होती है।
ज्योतिष के अनुसार, इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और मोक्ष का मार्ग खोलता है। यह महाशिवरात्रि साधकों और भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर है।
महाशिवरात्रि 2026 में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करें और जीवन में सकारात्मक बदलाव का अनुभव करें। ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा आप पर बनी रहेगी और जीवन से कष्ट भी दूर होंगे।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Samridhi Breja
पब्लिश्ड 31 January 2026 at 19:32 IST