अपडेटेड 12 January 2026 at 14:32 IST
Magh Pradosh Vrat 2026 Kab Hai: 15 या 16 जनवरी कब रखा जाएगा माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व
Magh Pradosh Vrat 2026 Kab Hai: अब जल्द ही माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत पड़ने वाला है। अब ऐसे में इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है? आइए जानते हैं।
Magh Pradosh Vrat 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। हर माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। साल 2026 के पहले महीने यानी माघ माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत बेहद खास होने वाला है, क्योंकि नए साल की शुरुआत के साथ ही भक्तों में इस बात को लेकर उलझन है कि व्रत 15 जनवरी को रखा जाए या 16 जनवरी को?
आइए जानते हैं कि माघ महीने का पहला प्रदोष कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है?
माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत और प्रदोष काल के आधार पर ही व्रत रखने का विधान है। वहीं त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 जनवरी को रात 8 बजकर 16 मिनट पर होने जा रहा है और इसका समापन 16 जनवरी को रात 08 बजकर 29 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से 15 जनवरी को रखा जाएगा।
माघ प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
प्रदोष काल पूजा समय - शाम 05:45 से रात 08:25 तक आप भगवान शिव की पूजा विधिवत रूप से कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें - अनुष्का-विराट की बेटी वामिका के 5वे जन्मदिन पर मां अनुष्का के 'मदरहुड' वाले नोट ने जीता सबका दिल
गुरु प्रदोष व्रत के दिन पूजा का महत्व क्या है?
जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'गुरु प्रदोष' कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि गुरु प्रदोष व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। ऐसी मान्यता है कि जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें यह व्रत पूरी श्रद्धा से करना चाहिए।
भगवान शिव की पूजा किस विधि से करें?
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करने का भी विधान है।
शाम के समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मंदिर में शिव परिवार की मूर्ति या शिवलिंग के पास दीपक जलाएं।
शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद अर्पित करें।
महादेव को 11 या 21 बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और सफेद फूल चढ़ाएं।
'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में कपूर से आरती करें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 12 January 2026 at 14:32 IST