अपडेटेड 16 December 2025 at 09:20 IST

December Pradosh Vrat 2025: 17 या 18 दिसंबर... कब है साल का आखिरी प्रदोष व्रत? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त का समय और पूजा विधि

December Pradosh Vrat 2025 Date and Time: साल का आखिरी प्रदोष व्रत दिसंबर में पड़ रहा है। जानें 17 या 18 दिसंबर में कौन-सी है सही तिथि, पूजा का शुभ समय और व्रत से जुड़ी विधि।

बुध प्रदोष व्रत 2025 | Image: Freepik

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का श्रेष्ठ व्रत माना जाता है। यह व्रत हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल यानी शाम के समय की गई शिव पूजा से जीवन के कष्ट, दोष और बाधाएं दूर होती हैं।

साल 2025 का आखिरी प्रदोष व्रत खास है, क्योंकि इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि यह व्रत 17 दिसंबर को है या 18 दिसंबर को, पूजा का सही समय क्या रहेगा और पूजा कैसे करनी चाहिए।

साल 2025 का आखिरी प्रदोष व्रत कब है?

पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 को रात 11:58 बजे से लेकर  18 दिसंबर 2025 को दोपहर 02:33 बजे तक रहेगी।

इस तरह 17 दिसंबर 2025 यानी बुधवार को पूरे दिन त्रयोदशी तिथि रहेगी। इसलिए साल 2025 का आखिरी प्रदोष व्रत 17 दिसंबर, बुधवार को रखा जाएगा। बुधवार होने के कारण इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

बुध प्रदोष व्रत 2025 के शुभ योग

यह प्रदोष व्रत और भी खास बन जाता है क्योंकि इस दिन कई शुभ और दुर्लभ योग बन रहे हैं, जैसे सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, सुकर्मा योग और धृति योग। इन योगों में की गई भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का फल कई गुना अधिक माना जाता है।

बुध प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त

बुध प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त 17 दिसंबर 2025 को शाम 05:27 बजे से रात 08:11 बजे तक रहने वाला है। इसी समय को प्रदोष काल कहा जाता है और इस दौरान पूजा करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • प्रदोष काल से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव, माता पार्वती व गणेश जी की प्रतिमा या चित्र रखें।
  • शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • भगवान शिव को बिल्व पत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करें।
  • शिव-पार्वती को खीर और गुड़ का भोग लगाएं।
  • रुद्राक्ष की माला से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें या सुनें।
  • अंत में शिव जी की आरती करें।
  • पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा प्रार्थना करें।

प्रदोष व्रत का महत्व

मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियम से प्रदोष व्रत रखते हैं, उनके जीवन से रोग, दोष, आर्थिक परेशानियां और मानसिक तनाव दूर होते हैं। साथ ही भगवान शिव की कृपा से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।


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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 16 December 2025 at 09:20 IST