अपडेटेड 24 January 2026 at 23:09 IST
Bhishma Ashtami 2026 Stotra: भीष्म अष्टमी के दिन जरूर करें गंगा चालीसा का पाठ, सुख-सौभाग्य का मिलेगा आशीर्वाद; पूरी होंगी मनोकामनाएं
Bhishma Ashtami 2026 Stotra: भीष्म अष्टमी सनातन धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है, जो पितामह भीष्म के त्याग और उनकी इच्छा मृत्यु के पावन क्षणों की याद दिलाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 26 जनवरी को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा जी में स्नान और उनके स्तोत्रों का पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
Bhishma Ashtami 2026 Stotra: हिंदू धर्म में भीष्म अष्टमी का विशेष महत्व है। यह दिन महाभारत के महानायक, इच्छा मृत्यु के वरदान प्राप्त पितामह भीष्म को समर्पित है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को 'भीष्म अष्टमी' के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भीष्म अष्टमी 26 जनवरी को मनाई जाएगी।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर इसी दिन अपने प्राण त्यागे थे। इस पावन अवसर पर तर्पण और पूजा-अर्चना का विधान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन गंगा चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है? आइए जानते हैं।
भीष्म अष्टमी के दिन जरूर करें गंगा चालीसा का पाठ
भीष्म अष्टमी के दिन गंगा चालीसा का पाठ करने का विशेष विधान है। इस दिन मां गंगा की पूजा करने की भी मान्यता है। इसलिए इस दिन गंगा स्तोत्र का पाठ अवश्य जरूर करें।
॥दोहा॥
जय जय जय जग पावनी,
जयति देवसरि गंग ।
जय शिव जटा निवासिनी,
अनुपम तुंग तरंग ॥
॥चौपाई॥
जय जय जननी हराना अघखानी ।
आनंद करनी गंगा महारानी ॥
जय भगीरथी सुरसरि माता ।
कलिमल मूल डालिनी विख्याता ॥
जय जय जहानु सुता अघ हनानी ।
भीष्म की माता जगा जननी ॥
धवल कमल दल मम तनु सजे ।
लखी शत शरद चंद्र छवि लजाई ॥ ४ ॥
वहां मकर विमल शुची सोहें ।
अमिया कलश कर लखी मन मोहें ॥
जदिता रत्ना कंचन आभूषण ।
हिय मणि हर, हरानितम दूषण ॥
जग पावनी त्रय ताप नासवनी ।
तरल तरंग तुंग मन भावनी ॥
जो गणपति अति पूज्य प्रधान ।
इहूं ते प्रथम गंगा अस्नाना ॥ ८ ॥
ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी ।
श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि ॥
साथी सहस्त्र सागर सुत तरयो ।
गंगा सागर तीरथ धरयो ॥
अगम तरंग उठ्यो मन भवन ।
लखी तीरथ हरिद्वार सुहावन ॥
तीरथ राज प्रयाग अक्षैवेता ।
धरयो मातु पुनि काशी करवत ॥ १२ ॥
धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीधी ।
तरनी अमिता पितु पड़ पिरही ॥
भागीरथी ताप कियो उपारा ।
दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा ॥
जब जग जननी चल्यो हहराई ।
शम्भु जाता महं रह्यो समाई ॥
वर्षा पर्यंत गंगा महारानी ।
रहीं शम्भू के जाता भुलानी ॥ १६ ॥
पुनि भागीरथी शम्भुहीं ध्यायो ।
तब इक बूंद जटा से पायो ॥
ताते मातु भें त्रय धारा ।
मृत्यु लोक, नाभा, अरु पातारा ॥
गईं पाताल प्रभावती नामा ।
मन्दाकिनी गई गगन ललामा ॥
मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी ।
कलिमल हरनी अगम जग पावनि ॥ २० ॥
धनि मइया तब महिमा भारी ।
धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी ॥
मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी ।
धनि सुर सरित सकल भयनासिनी ॥
पन करत निर्मल गंगा जल ।
पावत मन इच्छित अनंत फल ॥
पुरव जन्म पुण्य जब जागत ।
तबहीं ध्यान गंगा महं लागत ॥ २४ ॥
जई पगु सुरसरी हेतु उठावही ।
तई जगि अश्वमेघ फल पावहि ॥
महा पतित जिन कहू न तारे ।
तिन तारे इक नाम तिहारे ॥
शत योजन हूं से जो ध्यावहिं ।
निशचाई विष्णु लोक पद पावहीं ॥
नाम भजत अगणित अघ नाशै ।
विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशे ॥ २८ ॥
जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना ।
धर्मं मूल गंगाजल पाना ॥
तब गुन गुणन करत दुख भाजत ।
गृह गृह सम्पति सुमति विराजत ॥
गंगहि नेम सहित नित ध्यावत ।
दुर्जनहूं सज्जन पद पावत ॥
उद्दिहिन विद्या बल पावै ।
रोगी रोग मुक्त हवे जावै ॥ ३२ ॥
गंगा गंगा जो नर कहहीं ।
भूखा नंगा कभुहुह न रहहि ॥
निकसत ही मुख गंगा माई ।
श्रवण दाबी यम चलहिं पराई ॥
महं अघिन अधमन कहं तारे ।
भए नरका के बंद किवारें ॥
जो नर जपी गंग शत नामा ।
सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा ॥ ३६ ॥
सब सुख भोग परम पद पावहीं ।
आवागमन रहित ह्वै जावहीं ॥
धनि मइया सुरसरि सुख दैनि ।
धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी ॥
ककरा ग्राम ऋषि दुर्वासा ।
सुन्दरदास गंगा कर दासा ॥
जो यह पढ़े गंगा चालीसा ।
मिली भक्ति अविरल वागीसा ॥ ४० ॥
॥ दोहा ॥
नित नए सुख सम्पति लहैं, धरें गंगा का ध्यान ।
अंत समाई सुर पुर बसल, सदर बैठी विमान ॥
संवत भुत नभ्दिशी, राम जन्म दिन चैत्र ।
पूरण चालीसा किया, हरी भक्तन हित नेत्र ॥
ये भी पढ़ें - Suryadev Puja Niyam: सूर्यदेव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां, हो सकता है भारी नुकसान
भीष्म अष्टमी के दिन गंगा चालीसा स्तोत्र का पाठ करने का महत्व
भीष्म पितामह को 'गंगापुत्र' कहा जाता है। भीष्म अष्टमी पर गंगा जी की स्तुति करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा चालीसा का पाठ कर जल अर्पित करने से पितृ दोष समाप्त होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 24 January 2026 at 23:09 IST