समंदर को दो हिस्सों में बांटने वाली 32 किमी लंबी दीवार... नीदरलैंड के इस ‘अजूबे बांध’ को देखकर PM मोदी भी रह गए हैरान, बोले- भारत भी...

अफ्सलुइटडिज्क बांध के दौरे के दौरान पीएम मोदी और डच प्रधानमंत्री के बीच जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन से निपटने में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। पीएम मोदी ने बांध का दौरा कर नीदरलैंड के वाटर मैनेजमेंट को लेकर बड़ी बात कही।

नीदरलैंड के इस ‘अजूबे बांध’ को देखकर PM मोदी भी रह गए हैरान | Image: X@narendramodi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नीदरलैंड की यात्रा के दौरान डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ विश्व प्रसिद्ध अफ्सलुइटडिज्क बांध (Afsluitdijk) बांध का दौरा किया। नीदरलैंड के इस ‘अजूबे बांध’ को देखकर PM मोदी भी हैरान रह गए। उन्होंने बांध दोरे की कई तस्वीरों को अपने X हैंडल पर शेयर किया है,साथ ही वो यहां के वाटर मैनेजमेंट को देखकर कायल हो गए। आइए जानते हैं समंदर के सीने पर बने इस बांध की खासियत के बारे में...

अफ्सलुइटडिज्क बांध के दौरे के दौरान पीएम मोदी और डच प्रधानमंत्री के बीच जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन से निपटने में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। पीएम मोदी ने जिस ऐतिहासिक बांध का दौरा किया, वह मात्र एक बांध नहीं बल्कि वैश्विक जल प्रबंधन का सबसे बड़ा रोल मॉडल माना जाता है।

पीएम मोदी ने शेयर की बांध की तस्वीरें

अफ्सलुइटडिज्क बांध के दौरे के बाद सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, 'एक एरिया जिसमें नीदरलैंड ने बहुत अच्छा काम किया है, वह है वॉटर मैनेजमेंट। वाटर मैनेजमेंट के क्षेत्र में नीदरलैंड ने दुनिया के सामने एक मिशाल पेश की है। पूरी इंटरनेशनल कम्युनिटी इससे बहुत कुछ सीख सकती है।'

अफ्सलुइटडिज्क बांध को देख क्या बोले पीएम मोदी?

'पीएम मोदी ने आगे लिखा, 'आज सुबह, मुझे अफ्स्लुइटडिज्क जाने और इस प्रोजेक्ट की खास बातों के बारे में जानने का मौका मिला। मैं प्राइम मिनिस्टर रॉब जेटन का शुक्रगुजार हूं कि वे मेरे साथ यहां आए। हम इंडिया में मॉडर्न टेक्नोलॉजी लाने के लिए कमिटेड हैं, जिसका मकसद सिंचाई, बाढ़ से बचाव और इनलैंड वॉटरवे नेटवर्क को बढ़ाने में मदद करना है।'

32 किलोमीटर लंबा और 90 मीटर चौड़ा बांध की खासियत

अफ्सलुइटडिज्क बांध 1932 में निर्मित 32 किलोमीटर लंबा और 90 मीटर चौड़ा मेगास्ट्रक्चर समुद्र को दो हिस्सों में बांटकर खड़ा है। यह बांध केवल एक जल परियोजना नहीं बल्कि एक हाइवे भी है। इस बांध ने जुइडरजी समुद्र के एक बड़े हिस्से को घेरकर नीदरलैंड्स को समुद्री लहरों और चक्रवातों से स्थायी सुरक्षा प्रदान की है।

मीठे पानी की झील का निर्माण 

इस बांध की सबसे खास बात यह है कि इसने खारे समुद्री पानी को रोककर नदियों के मीठे पानी से इज्सलमीर (IJsselmeer) नामक विशाल कृत्रिम मीठे पानी की झील का निर्माण किया, जो आज नीदरलैंड्स के पेयजल का प्रमुख स्रोत है। नीदरलैंड्स का बड़ा हिस्सा समुद्र तल से नीचे होने के कारण हमेशा बाढ़ के खतरे में रहता है। अफ्सलुइटडिज्क इस देश के लिए अभेद्य सुरक्षा कवच साबित हुआ है।

बांध के ऊपर से गुजरता है चार लेन हाईवे 

यह बांध सिर्फ जल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग भी है।  इसके ऊपर A7 मोटरवे का चार लेन हाईवे गुजरता है, जो उत्तरी हॉलैंड और फ्राइजलैंड प्रांतों को आपस में सीधे जोड़ने  का काम करता है।

बांध में आधुनिक डिस्चार्ज स्लूइस (निकासी द्वार) और पंपिंग स्टेशन लगाए गए हैं, जो स्वचालित रूप से अतिरिक्त मीठे पानी को समुद्र में छोड़ते हैं। वर्तमान में इसे ग्रीन एनर्जी हब में भी बदला जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा पैनल और विंड टर्बाइन लगाए गए हैं।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 17 May 2026 at 19:10 IST