'है बहुत अंधियारा अब सूरज निकलना चाहिए, जिस तरह से भी हो ये...', राज्य सभा में पीएम मोदी ने पढ़ी गोपालदास नीरज की कविता
पीएम मोदी ने कहा "है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए, जिस तरह से भी हो यह मौसम बदलने चाहिए" नीरज जी ने कांग्रेस के उसे कॉलखंड में यह कविता कही थी।
- प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी
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PM Modi in Rajya Sabha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते कांग्रेस को जमकर घेरा। इस दौरान पीएम मोदी ने एक शेर भी पढ़ा। "तमाशा करने वालों को क्या खबर, हमने कितने तूफानों को पार कर, दीया जलाया है...।"
पीएम मोदी ने कहा इस बार में देख रहा था कि खड़गे जी कविताएं पढ़ रहे थे, शेरो-शायरियां पढ़ रहे थे लेकिन जो बातें बता रहे थे और आपने बिल्कुल सही पकड़ा था कि यह तो बताओ जरा यह कविताएं है कब की? उनको पता था यह कविताएं कब की है, भीतर कांग्रेस के दुर्दशा का इतना दर्द पड़ा था लेकिन वहां हालत ये है कि बोल नहीं सकते हैं तो उन्होंने सोचा कि अच्छा मंच है यही बोल दें और इसलिए उन्होंने नीरज की कविता के माध्यम से उनके घर के हालात यहां प्रस्तुत किए हैं।
जब पीएम मोदी ने संसद में पढ़ीं नीरज जी की पंक्तियां...
पीएम मोदी ने कहा कि सभापति जी खड़गे जी को मैं आज उन्हीं नीरज जी की कुछ पंक्तियां सुनना चाहता हूं, कांग्रेस सरकार का जो दौर था उस समय नीरज जी ने कविताएं लिखी थी उन्होंने कहा था, "है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए, जिस तरह से भी हो यह मौसम बदलने चाहिए" नीरज जी ने कांग्रेस के उसे कॉलखंड में यह कविता कही थी। 1970 में जब चारों तरफ कांग्रेस ही कांग्रेस का राज चलता था, उसे समय नीरज जी का एक और कविता संग्रह प्रकाशित से हुआ था, 'फिर दीप जलेगा' उसमें उन्होंने कहा था 'मेरे देश उदास ना हो, फिर दीप जलेगा, तिमिर डालेगा'।
अटल जी ने कहा था- सूरज निकलेगा, अंधेरा छटेगा, कमल खिलेगा- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारा सद्भाग्य देखिए हमारे प्रेरणापुंज अटल बिहारी वाजपेई ने भी 40 साल पहले कहा था, "सूरज निकलेगा, अंधेरा छटेगा, कमल खिलेगा"। नीरज जी ने जो कहा था कि जब तक कांग्रेस का सूरज चमकता रहा, देश ऐसा ही अंधेरे में रहता रहा, कई दशक तक ऐसे ही हल बन रहे।
Published By : Deepak Gupta
पब्लिश्ड 6 February 2025 at 18:01 IST