संघ कटुता की कोई जगह नहीं, देश की सेवा ही प्रथम धर्म...RSS शताब्दी समारोह में बोले PM मोदी
नई दिल्ली के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का शताब्दी समारोह और स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित हुआ।
नई दिल्ली के डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का शताब्दी समारोह और स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विशेष रूप से तैयार किया गया स्मृति डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया।
पीएम मोदी ने इस मौके पर पूर्व आरएसएस स्वयंसेवक विजय कुमार मल्होत्रा को श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों को नवरात्रि एवं विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के साक्षी बनना गौरव की बात है। पीएम मोदी ने विशेष उल्लेख किया कि जारी सिक्के पर पहली बार भारत माता की तस्वीर अंकित की गई है, जिस पर संघ का बोधवाक्य भी लिखा गया है।
संघ का राष्ट्र निर्माण में योगदान
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक शुरू से ही राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1963 में गणतंत्र दिवस परेड में भी स्वयंसेवक शामिल हुए थे और देशभक्ति की धुनों पर कदम मिलाए थे। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज के हर आयाम को छुआ है, चाहे वह आदिवासी कल्याण हो या आपदाओं के समय सेवा कार्य।
पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि 1956 के भुज भूकंप, 1984 के सिख दंगों और उत्तराखंड की त्रासदी जैसे कठिन समय में संघ के स्वयंसेवक हर बार अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। उन्होंने कहा कि संघ ने न केवल सेवा भावना को अपनाया बल्कि आदिवासी परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण में भी बड़ा योगदान दिया।
आजादी और ऐतिहासिक संघर्षों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने आरएसएस संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार की आजादी के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी का उल्लेख करते हुए बताया कि दादरा-नगर हवेली से लेकर हैदराबाद निजाम तक के संघर्षों में संघ का योगदान रहा। उन्होंने कहा कि संघ पर जब भी प्रतिबंध लगाए गए, स्वयंसेवकों ने लोकतंत्र पर अटूट विश्वास बनाए रखा और कभी कटुता को जन्म नहीं लेने दिया।
चुनौतियों पर विचार और भविष्य की दिशा
पीएम मोदी ने कहा कि संघ ने हमेशा अपनी शाखाओं के माध्यम से व्यक्ति निर्माण पर बल दिया है। उन्होंने शाखाओं को त्याग और समर्पण की पाठशाला बताया जहां "अहं से वयम" (मैं से हम) की यात्रा होती है। उन्होंने स्वीकार किया कि संघ की स्थापना के समय चुनौतियां अलग थीं और आज अलग हैं। सौ वर्ष पहले गुलामी से मुक्ति और संस्कृति की रक्षा चुनौती थी, जबकि आज भारत विकास की राह पर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता, जनसांख्यिकीय बदलाव और वैश्विक साजिशों को आज की प्रमुख चुनौतियां बताते हुए कहा कि संघ ने इन मुद्दों की पहचान कर रोडमैप तैयार किया है।
परंपरा और विरासत का पुनरुत्थान
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विजयादशमी और संघ की स्थापना का मेल कोई संयोग नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी परंपरा का पुनरुत्थान है। उन्होंने बताया कि यह राष्ट्र चेतना समय-समय पर विभिन्न स्वरूप में प्रकट होती रही है और संघ उसी की कड़ी है। पीएम मोदी ने संघ के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार को नमन किया और कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि हम संघ के शताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों और पूरे देश को इस अवसर की शुभकामनाएं दीं।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 1 October 2025 at 14:19 IST