Heart Attack vs Cardiac Arrest: नाना पाटेकर को आया था कार्डियक अरेस्ट, जानिए ये हार्ट अटैक से कितना अलग और क्यों है ज्यादा खतरनाक?

अभिनेता नाना पाटेकर के कार्डियक अरेस्ट आने की खबर के बाद लोग कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के बीच के अंतर को लेकर असमंजस में हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि दोनों में क्या अंतर होता है?

Heart Attack vs Cardiac Arrest: नाना पाटेकर को आया था कार्डियक अरेस्ट, जानिए ये हार्ट अटैक से कितना अलग और क्यों है ज्यादा खतरनाक? | Image: ANI

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का कार्डियक अरेस्ट से निधन होने के बाद एक बार फिर लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियों के प्रति गंभीर होने पर मजबूर कर दिया है। अक्सर लोग 'हार्ट अटैक' और 'कार्डियक अरेस्ट' को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस में ये दोनों पूरी तरह अलग स्थितियां हैं।
आइए जानते हैं कि कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में क्या अंतर है, यह महिलाओं और पुरुषों को कैसे प्रभावित करता है और इससे बचाव के क्या उपाय हैं।

डॉ. वैभव मिश्रा  ने बताया हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर

हार्ट अटैक सर्कुलेशन की समस्या यह तब होता है जब दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है। इसमें दिल धड़कता रहता है, लेकिन मांसपेशियों को ऑक्सीजन न मिलने से नुकसान पहुंचता है।
वहीं कार्डियक अरेस्ट इलेक्ट्रिकल समस्या है यह तब होता है जब दिल की इलेक्ट्रिकल रिदम में अचानक गड़बड़ी आ जाती है, जिससे दिल अचानक धड़कना और खून पंप करना बंद कर देता है। व्यक्ति सेकंडों में बेहोश हो जाता है और सांसें थम जाती हैं।
यही कारण है कि कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक की तुलना में अधिक खतरनाक और जानलेवा माना जाता है क्योंकि इसमें मरीज को संभलने का मौका तक नहीं मिलता है।

क्या कार्डियक अरेस्ट सिर्फ रात में आता है?

फोर्टिस हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी डायरेक्टर डॉ. विनीत बंगा के अनुसार यह एक आम भ्रम है कि कार्डियक अरेस्ट सिर्फ रात को या सोते समय ही आता है। कार्डियक अरेस्ट किसी भी समय, दिन या रात में आ सकता है। हालांकि, सोते समय या तड़के सुबह शरीर के ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम, ब्लड प्रेशर, हार्मोनल स्तर और सांस लेने के तरीके में बदलाव होता है। जिन लोगों को स्लीप एपनिया, दिल की धड़कन का असामान्य होना या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याएं होती हैं, उनमें इस दौरान जोखिम बढ़ सकता है।

पुरुषों और महिलाओं में अलग होते हैं लक्षण

महिलाओं और पुरुषों में दिल के दौरे के लक्षण काफी भिन्न हो सकते हैं। 
पुरुषों में सामान्य लक्षण- छाती में तेज दबाव या दर्द, दर्द का बाएं हाथ या जबड़े तक फैलना, सांस फूलना और ठंडा पसीना आना।
महिलाओं में सूक्ष्म लक्षण- महिलाओं में अक्सर छाती के दर्द के बजाय असामान्य थकान, जी मिचलाना, उल्टी, चक्कर आना, पीठ या जबड़े में दर्द और अपच जैसी बेचैनी महसूस होती है। इस वजह से कई बार महिलाएं इसे अनदेखा कर देती हैं और इलाज में देरी हो जाती है।

कार्डियक अरेस्ट और ब्रेन स्ट्रोक अचानक आने वाले खतरे

कार्डियक अरेस्ट की तरह ही ब्रेन स्ट्रोक भी एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है जो अचानक होती है। ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग की नसों में खून का बहाव रुक जाता है या कोई नस फट जाती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, स्मोकिंग और कोलेस्ट्रॉल इसके मुख्य कारण हैं।

बचाव और तुरंत क्या इलाज करें 

दिल और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार जरूरी है। 
नियमित रूप से बीपी, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
संतुलित आहार लें, वजन नियंत्रित रखें और रोजाना व्यायाम करें।

स्ट्रोक के संकेत जानें 

चेहरे का झुकना, हाथ में कमजोरी, बोलने में दिक्कत  दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचें।

इमरजेंसी में क्या करें?

यदि आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, बेहोश हो जाए या उसकी सांसें रुक जाएं, तो बिना समय गंवाए तुरंत इमरजेंसी सेवा को कॉल करें। यदि आपको आता हो, तो तुरंत CPR देना शुरू करें और यदि उपलब्ध हो तो AED का उपयोग करें। समय पर दी गई CPR किसी की जान बचा सकती है।

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 8 October 2026 at 23:42 IST