दिल्ली में बनेगा IIFT का हाई-टेक कैंपस, NBCC ने रखी आधारशिला; 350 करोड़ रुपये की लागत से बदल जाएगी तस्वीर

NBCC ने दिल्ली के मैदानगढ़ी में IIFT के नए हाई-टेक कैंपस की आधारशिला रखी है। 350 करोड़ की लागत से बनने वाला ये कैंपस आधुनिक सुविधाओं और ग्रीन बिल्डिंग तकनीक से लैस होगा। पढ़ें पूरी खबर।

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दिल्ली में बनेगा IIFT का हाई-टेक कैंपस | Image: Republic

NBCC IIFT Campus in Delhi: सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी और नवरत्न उद्यम एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने देश की राजधानी में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दिल्ली के मैदानगढ़ी में भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) के नए अत्याधुनिक परिसर की आधारशिला रखी गई। 

•    लगभग 350 करोड़ रुपये की संस्वीकृत लागत 
•    लगभग 54,000 वर्गमीटर के कुल निर्मित क्षेत्रफल के साथ 7.55 एकड़ के भूखंड पर विकास कार्य 
•    न्यूनतम 3-स्टार गृहा रेटिंग प्राप्त करने का लक्ष्य 

कैंपस की मुख्य विशेषताएं क्या होंगी?   

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आने वाले नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम, एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने 5 मई, 2026 को मैदानगढ़ी, नई दिल्ली में भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के नए परिसर की आधारशिला रखी। डिज़ाइन, इंजीनियरी, अधिप्राप्ति और निर्माण (ईपीसी) के आधार पर निष्पादित की जा रही इस परियोजना की संस्वीकृत लागत लगभग 350 करोड़ रुपये है। डॉ. के.पी. महादेवास्वामी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की अध्यक्षता की। इस समारोह में डॉ. सुमन कुमार, निदेशक (वाणिज्य) के साथ-साथ वरिष्ठ गण्यमान्य व्यक्ति, संस्थागत हितधारक और एनबीसीसी के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।  

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. महादेवास्वामी ने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना केवल आईआईएफटी के भौतिक विस्तार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और संस्था की सहयोग करने की क्षमता में एक दीर्घकालिक निवेश है।
दक्षिण दिल्ली में 7.55 एकड़ भूमि पर आईआईएफटी का नया परिसर विकसित किया जा रहा है जो मेट्रो स्टेशनों, प्रमुख सड़क नेटवर्क्स और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित शहर के प्रमुख हिस्सों से उत्कृष्ट रूप से जुड़े होने के साथ-साथ कार्यनीतिक रूप से छतरपुर के निकट स्थित है। आधुनिक और एकीकृत शैक्षणिक केंद्र के रूप में परिकल्पित, इस परिसर का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 54,000 वर्ग मीटर होगा, जिसे संस्थान के मौजूदा परिसर की क्षमताओं को पूरक एवं विस्तारित करने हेतु डिज़ाइन किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य एक ऐसा समग्र वातावरण प्रदान करना है जो शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान नवोन्मेष और वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा दे।

परिसर को अत्याधुनिक शैक्षणिक, आवासीय और संस्थागत सुविधाओं को शामिल करने के लिए सोच-विचार करके  डिजाइन किया गया है। प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाने हेतु शैक्षणिक ब्लॉक में स्मार्ट क्लासरूम, विभिन्न क्षमताओं वाले व्याख्यान हॉल, संकाय कार्यालय, सम्मेलन कक्ष तथा एक आधुनिक लाइब्रेरी होगी। परिसर की एक प्रमुख विशेषता 1000 सीटों वाला एक सभागार होगा जो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों और संस्थागत कार्यक्रमों की मेजबानी के लिए सुसज्जित होगा। छात्रों के लिए आवासीय सुविधाओं में 600 से अधिक छात्रों के रहने की क्षमता वाला आधुनिक छात्रावास परिसर शामिल है, जिसमें भोजन, फिटनेस और मनोरंजन की सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त, संकाय सदस्यों के लिए समर्पित आवासीय इकाइयाँ संसक्त और जीवंत परिसर समुदाय सुनिश्चित करेंगी।

पर्यावरण और स्थिरता पर जोर 

इस परियोजना में एलईडी लाइटिंग, सौर फोटोवोल्टिक संयंत्र और उन्नत एचवीएसी सिस्टम जैसे ऊर्जा-कुशल सिस्टम शामिल होने के साथ पैसिव डिज़ाइन कार्यनीतियाँ अपनाई गई हैं जो नियमित रूप से उपयोग किए जाने वाले स्थानों में 80 प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक प्रकाश का उपयोग करती हैं। इस परिसर में पारिस्थितिक फूटप्रिंट कम करते हुए तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हुए वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण प्रणाली, पर्यावरण पर कम प्रभाव डालने वाली निर्माण सामग्री और कुशल अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों का भी उपयोग किया जाएगा।
शैक्षणिक और आवासीय सुविधाओं के अलावा, परिसर में 400 से अधिक वाहनों की क्षमता वाले दो-स्तरीय बेसमेंट पार्किंग, सार्वभौमिक डिजाइन मानकों के अनुरूप बाधा-मुक्त पहुंच, उन्नत अग्नि सुरक्षा प्रणाली और पैदल यात्रियों तथा वाहनों के लिए सुव्यवस्थित आवागमन नेटवर्क सहित आधुनिक अवसंरचना शामिल होगा। इस डिजाइन में हरे-भरे कोर्टयार्डस, खुले स्थान और आपस में जुड़े हुए रास्ते शामिल हैं, जिससे एक सक्रिय एवं संवादात्मक परिसर का वातावरण निर्मित होता है।

एनबीसीसी के लिए, यह परियोजना देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत और सरकारी अवसंरचना के उसके पोर्टफोलियो में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि है। नवरत्न सीपीएसई के रूप में एनबीसीसी, जिसे बड़े पैमाने पर परियोजनाओं के निष्पादन में गहरी विशेषज्ञता प्राप्त है, की भागीदारी परियोजना की महत्वाकांक्षा और उसके सुपुर्दगी क्षमताओं में रखे गए विश्वास का प्रतीक है। 

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Published By : Nidhi Mudgill

पब्लिश्ड 6 May 2026 at 21:19 IST