अपडेटेड 15 January 2026 at 20:40 IST
माथे पर तिलक और रुद्राक्ष की माला पहन जब रेसलिंग में उतरता तो कांपते थे खिलाड़ी... प्रेमानंद महाराज की झलक पाते ही सब छोड़ बन गया संन्यासी
Rinku Rajput: कभी रिंग में पहलवानों के छक्के छुड़ाने वाला रिंकू राजपूत आज प्रेमानंद महाराज के आश्रम में सेवा कर रहा है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने सब कुछ छोड़ अध्यात्म का रास्ता अपना लिया।
Rinku Rajput: पूर्व WWE रेसलर और स्पोर्ट्स स्टार रहे रिंकू राजपूत पूरी तरह से आध्यात्मिक जीवन अपना चुके हैं। वो अब वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के सानिध्य में रह रहे हैं और सादगी भरा जीवन जी रहे हैं। 5 साल तक अमेरिका में रेसलिंग कर चुके रिंकू ने अचानक धर्म और अध्यात्म का रास्ता कैसे चुना? चलिए बताते हैं।
रिंग में 'वीर महान' नाम से मशहूर रिंकू अब पूरी तरह से आध्यात्मिक जीवन में रम चुके हैं। वे आश्रम में सेवा करते हैं और प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें और वीडियो भी शेयर किए हैं।
जब प्रेमानंद की शरण में पहुंचे रिंकू
बताया जाता है कि रिंकू कई दफा प्रेमानंद महाराज के आश्रम में उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे। 2 साल पहले वो गुरु जी की शरण में मन में कई सवाल लेकर गए। उन्होंने महाराज से कहा कि 'पिछले कुछ समय से आपका सत्संग सुन रहा हूं। 5 सालों से अमेरिका में रेसलर हूं। माता-पिता दुनिया से चल बसे। लेकिन महसूस होता है कि मैं उनकी सेवा नहीं कर पाया।'
उन्होंने प्रेमानंद महाराज से आगे कहा कि 'गुरुदेव आप मेरे सपने में आए थे और नाम दिया। अब मेरे मन में सवाल उठता है कि मैं अमेरिका में रेसलिंग जारी रखूं या फिर भारत में आकर भक्ति करूं और देश की सेवा करूं। कुछ समझ नहीं आ रहा है, मेरा मार्गदर्शन करें।'
प्रेमानंद महाराज ने दिया था ये जवाब
प्रेमानंद महाराज ने रिंकू को जवाब देते हुए कहा था कि 'जहां भी हो, वहीं भगवान है। हर जगह भगवान हैं तो वहां (अमेरिका) भी हैं। आप जहां भी हो भगवान के हो। अपनी बल और बुद्धि को समाज की सेवा में लगाओ, जिससे दूसरों को लाभ, सुख और आनंद मिले। भले ही खुद को पीड़ा हो, लेकिन दूसरों को सुख की प्राप्ति हो। इसे धर्म कहते हैं और धर्म का फल श्री हरि के चरणों में भक्तिमय हो जाना है। नाम जप करो, व्यसन मन करो और बुरे बर्ताव से बचे रहो।'
'भगवान को नहीं जाना तो सब व्यर्थ'
रिंकू से प्रेमानंद महाराज ने पूछा कि ठीक हो, शरीर ठीक है, मन ठीक है? इसके जवाब में रिंकू ने कहा था कि मन ठीक नहीं है। वो भगवन प्राप्ति के लिए अपना सबकुछ छोड़कर आना चाहते हैं। महाराज ने उन्हें समझाते हुए कहा कि प्रदर्शन से अर्थ की प्राप्ति और नाम हो सकता है, लेकिन भगवान को नहीं जाना तो सब व्यर्थ है।
रिंकू को प्रेमानंद महाराज के प्रवचन इतने प्रिय लगने लगे कि वो उनकी दर्शन के खोजी रहने लगे। वो अक्सर प्रेमानंद महाराज से मिलने को आतुर रहते थे। जब वो दोबारा महाराज से मिलने पहुंचे तो उन्होंने उनसे कहा कि गुरुदेव आज्ञा देते तो यहीं आ जाता। प्रेमानंद ने मुस्कुराते हुए कहा था कि हम भी चाहते हैं कि आप हमारे देश का जितना नाम रोशन कर पाएं करें। आपकी जीत हमारे भारत की जीत है।
मन संसार के खेलों से ऊब चुका है- रिंकू
उन्होंने रिंकू से कहा कि संयम से रहें और जब कभी लगे कि मन संसार के खेलों से ऊब चुका है तो आकर आनंद से भजन करो। अपना जीवन भगवान को समर्पित कर दो। रिंकू ने बिना समय गवाएं कह डाला कि ऐसा ही लगने लगा है।
प्रेमानंद महाराज ने बड़ी ही सरलता के साथ कहा अगर संसार के खेलों से ऊबने लगे हैं तो दिव्य भगवान की प्राप्ति के लिए मार्ग में चला जाए। जीवन का असल लाभ इसे छोड़ और कुछ नहीं। अब आप देख लीजिए।
संघर्षो से भरा रहा शुरुआती जीवन
रिंकू के शुरुआती जीवन की बात करें तो वो काफी संघर्षो से भरा रहा है। यूपी के भदोही जिले के गोपीगंज में जन्मे रिंकू के पिता ट्रक ड्राइवर थे। वो कुल आठ भाई-बहन थे। सभी एक छोटे से कमरे में रहते थे। पानी कुएं से भरकर लाना पड़ता था। इन सबके बावजूद खेलों की तरफ रिंकू का झुकाव जारी रहा। उन्होंने जैवलिन थ्रो, क्रिकेट और दूसरे खेलों में हाथ आजमाया। उन्होंने जैवलिन थ्रो में जूनियर लेवल पर नेशनल मेडल जीता।
2018 में WWE में ली एंट्री
हालांकि उन्हें पहलवानी का खासा शौक रहा। रिंकू ने साल 2018 में रिंकू ने WWE में एंट्री ली और ‘वीर महान’ के नाम से पहचान बनाई। रिंग में उतरते समय गले में रुद्राक्ष की माला और तिलक उनकी अलग पहचान बनी। वो जॉन सीना, द ग्रेट खली समेत कई पहलवानों के छक्के छुड़ा चुके हैं।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 15 January 2026 at 20:40 IST