'क्या सीरिया बन चुका है कोलकाता', हरे झंडों से पट गई कोलकाता की सड़क, बस से उतरवा दिए गए भगवा झंडे; बीजेपी भड़की
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने आरोप लगाए कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बसों से जबरन भगवा झंडे उतारे जा रहे हैं। हिंदू समुदाय को ध्यान देना चाहिए।
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West Bengal: पश्चिम बंगाल के हालात दिनों दिन नाजुक हो रहे हैं। बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के साथ वहां डेमोग्राफी में बड़े स्तर पर बदलाव के दावे होते रहे हैं। आरोप-प्रत्यारोपों के बीच कोलकाता में हिंदुओं के भगवा झंडे को उतरवाना, वहां दूसरे समुदायों के साथ कथित तौर पर दूसरे देशों के झंडे फहराना पश्चिम बंगाल की असली स्थिति को बयां करता है। भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल के हालातों की तुलना अभी बांग्लादेश, सीरिया और अफगानिस्तान के हालातों से कर रही है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक वीडियो शेयर किया है। इस कथित वीडियो में भीड़ एक बस को घेरे खड़ी थी, नारेबाजी की जा रही थी। दूसरे समुदाय के झंडे फहराए जा रहे थे। इसमें हैरानी की बात रही कि यहां बस से एक युवक को भगवा झंडे को हटाना पड़ा, क्योंकि विरोध जबरदस्त था। ये हालात पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दिखाई दिए।
ममता बनर्जी पर सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाए
सुवेंदु अधिकारी पोस्ट में लिखते हैं- 'साहस, बलिदान और वीरता का प्रतीक भगवा ध्वज, कट्टरपंथियों की भीड़ ने बस से जबरन उतार दिया। क्या यही वो सद्भाव और सहिष्णुता है जिसके लिए स्वामीजी खड़े थे? ममता बनर्जी की निगरानी में इस तरह की हरकतें बिना रोक-टोक हो रही हैं और पुलिस चुपचाप खड़ी है। हमारी संस्कृति और मूल्यों के प्रति सम्मान कहां है?'
दिलीप घोष बोले- क्या कोलकाता सीरिया बन गया है
सुवेंदु अधिकारी के बाद बीजेपी नेता दिलीप घोष ने भी उस वीडियो को साझा किया। वो कहते हैं- 'यहां आपको हमास, फिलिस्तीन, पाकिस्तान, सीरिया और यहां तक कि आईएसआईएस के झंडे लहराते हुए मिलेंगे, लेकिन रामनवमी के झंडे कारों से हटा दिए जाते हैं। क्या कोलकाता ढाका, सीरिया या अफगानिस्तान बन गया है?'
दिलीप घोष एक पोस्ट में लिखते हैं- 'पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बसों से जबरन भगवा झंडे उतारे जा रहे हैं। हिंदू समुदाय को ध्यान देना चाहिए- पश्चिम बंगाल को पश्चिम बांग्लादेश में बदलने की नींव रखी जा रही है। हिंदुओं को सद्भाव का पाठ पढ़ाया जाएगा, लेकिन बाकी लोगों का क्या?'
Published By : Dalchand Kumar
पब्लिश्ड 11 April 2025 at 14:09 IST